Indore Crime : इंदौर की एक जिला अदालत ने बहुचर्चित शिवानी पटेरिया हत्याकांड में करीब साढ़े छह साल बाद न्याय की मिसाल पेश की है। अदालत ने आरोपी पति अमितेष उर्फ शालू पटेरिया को अपनी पत्नी की जघन्य हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह मामला न केवल एक महिला की निर्मम हत्या का है, बल्कि एक अत्यंत शातिर दिमाग द्वारा रची गई उस साजिश का भी है, जिसमें उसने अपराध को प्राकृतिक मौत (सर्पदंश) साबित करने की कोशिश की थी। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से माना कि आरोपी ने पूर्व नियोजित तरीके से अपनी पत्नी को मौत के घाट उतारा।

30 हजार में खरीदा था जहरीला कोबरा, रची थी खौफनाक साजिश
अभियोजन पक्ष द्वारा अदालत में पेश तथ्यों के अनुसार, बैंक अधिकारी अमितेष ने अपनी पत्नी शिवानी को रास्ते से हटाने के लिए एक बेहद क्रूर योजना बनाई। उसने राजस्थान के अलवर से ब्लैक डेजर्ट प्रजाति का एक अत्यंत जहरीला कोबरा 30 हजार रुपए में खरीदा। आरोपी ने इस विषैले सांप को कई दिनों तक अपने घर में छिपाकर रखा। 1 दिसंबर 2019 को उसने बड़ी चालाकी से शिवानी की गला दबाकर हत्या कर दी। हत्या के बाद पूरे मामले को सर्पदंश का रूप देने के लिए मृत कोबरा के दांतों को पत्नी के हाथ में गड़ा दिया ताकि लोग इसे सांप के काटने से हुई मौत समझें।

पोस्टमार्टम ने खोली साजिश की परतें और झूठी कहानी का सच
घटना को अंजाम देने के बाद अमितेष ने अपने किरायेदार के साथ मिलकर शव को एमवाय अस्पताल पहुंचाया और डॉक्टरों को सर्पदंश की झूठी कहानी सुनाई। हालांकि, शिवानी के मायके वालों ने शुरुआत से ही इस पर संदेह जताया। पुलिस जब मौके पर पहुंची, तो उन्हें घर में मृत कोबरा मिला, जिससे शक गहरा गया। सबसे बड़ी सफलता पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मिली। मेडिकल बोर्ड ने साफ कर दिया कि शिवानी की मौत सांप के जहर से नहीं, बल्कि दम घुटने से हुई है। गला दबाने के स्पष्ट निशान और फोरेंसिक जांच में मिले सबूतों ने आरोपी की सर्पदंश वाली कहानी को पूरी तरह झूठा साबित कर दिया।

दूसरी महिला से संबंध और विवाद बनी हत्या की असली वजह
पुलिस पूछताछ में पहले तो अमितेष जांच को भटकाने की कोशिश करता रहा, लेकिन बाद में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी का किसी दूसरी महिला के साथ संबंध था, जिसके चलते वह अपनी पत्नी से छुटकारा पाना चाहता था। दोनों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। पड़ोसियों ने भी गवाही दी कि घटना के समय घर में केवल पति-पत्नी ही मौजूद थे। अदालत ने मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, फोरेंसिक साक्ष्य और गवाहों के बयानों को आधार बनाते हुए आरोपी को दोषी पाया।
हत्या के साथ वन्यजीव अधिनियम के तहत भी मिली कड़ी सजा
अदालत ने हत्या के अपराध के लिए अमितेष को उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके अलावा, उसे सबूत मिटाने के लिए दो वर्ष का कारावास और संरक्षित वन्यजीव कोबरा की हत्या करने के लिए तीन वर्ष की सजा के साथ 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है। वन विभाग और वेटरनरी विशेषज्ञों की रिपोर्ट ने भी साबित किया कि बरामद कोबरा अत्यंत विषैला था, लेकिन शिवानी के शरीर पर सांप के काटने के कोई वास्तविक वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं मिले थे। इस प्रकार, अदालत ने हत्या और सबूत मिटाने की साजिश को पूरी तरह बेनकाब कर दिया।











