Dhaka Violence: बांग्लादेश की राजनीति में शुक्रवार को हिंसा की एक बड़ी लहर देखने को मिली जब राजधानी ढाका में स्थित जातीय पार्टी के सेंट्रल ऑफिस पर गण अधिकार परिषद के कार्यकर्ताओं ने हमला कर दिया। हमलावरों ने ऑफिस में जमकर तोड़फोड़ की और कई मंजिलों में आग लगा दी। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

फायर ब्रिगेड और पुलिस की मुस्तैदी
घटना की सूचना मिलते ही फायर सर्विस की टीमें मौके पर पहुंच गईं और आग बुझाने का प्रयास शुरू कर दिया। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले और साउंड ग्रेनेड का इस्तेमाल करना पड़ा। देर शाम तक आग पर काबू पाने और इलाके को खाली कराने की कोशिशें जारी थीं।

पुरानी रंजिश का नतीजा
जानकारी के अनुसार, ये हमला गण अधिकार परिषद के अध्यक्ष नुरुल हक नुर पर हुए हमले के जवाब में किया गया है। पिछले हफ्ते नुरुल हक नुर को एक विरोध प्रदर्शन के दौरान चोटें आई थीं। तभी से देशभर में जातीय पार्टी के कार्यालयों पर हमले हो रहे हैं। शुक्रवार की घटना भी नुरुल हक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के बाद सामने आई है।
राजबारी जिले में भी हिंसा, 50 से अधिक घायल
ढाका के साथ-साथ राजबारी जिले के गोआलंदा में भी हालात तनावपूर्ण रहे। यहां पद्मा नदी के किनारे स्थित नुरुल हक नुरु के घर और दरबार शरीफ पर एक कट्टरपंथी संगठन – ईमान-अकीदा रक्षा कमेटी ने हमला कर दिया। यह हमला जुमे की नमाज के बाद हुआ और इसमें कम से कम 50 लोग घायल हुए हैं।
हमलावरों ने दरबार शरीफ में तोड़फोड़ और आगजनी की। हालात बिगड़ने पर पुलिस के साथ रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) और सेना को भी मौके पर तैनात किया गया है। अभी तक किसी भी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।
राजनीतिक अस्थिरता गहराती
बांग्लादेश में इन दिनों राजनीतिक हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। जातीय पार्टी और गण अधिकार परिषद के बीच चल रही तनातनी ने अब हिंसक रूप ले लिया है। लगातार हो रही हिंसा और आगजनी की घटनाओं से आम जनता भी डरी हुई है।
ढाका और राजबारी में हुई हिंसक घटनाएं बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति की गहराती खाई को उजागर करती हैं। सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती है कि हालात को जल्द से जल्द सामान्य किया जाए और दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाए।
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