Largest Prehistoric Predator : आज से लगभग 167 मिलियन साल पहले, जब धरती पर विशालकाय डायनासोरों का राज था, उस समय भी एक ऐसा शिकारी जीव मौजूद था, जिसने वैज्ञानिकों को हैरानी में डाल दिया है। इस रहस्यमयी जीव का नाम है Breugnathair elgolensis, जिसे हाल ही में स्कॉटलैंड के आइल ऑफ स्काई (Isle of Skye) में खोजा गया। यह जीव आकार में छोटा था लेकिन इतना खतरनाक था कि डायनासोर के बच्चों को भी शिकार बनाकर चबा जाता था।

कौन था Breugnathair elgolensis?
B. elgolensis एक रहस्यमयी शिकारी था जिसकी लंबाई लगभग 41 सेंटीमीटर थी। दिखने में यह जीव एक छिपकली जैसा लगता था, लेकिन इसका सिर, जबड़े और दांत सांप जैसे तेज और नुकीले थे। इसकी बनावट इतनी अनोखी थी कि वैज्ञानिक पहले तय नहीं कर पाए कि यह सांप है या छिपकली। इसी कारण इसे “फॉल्स स्नेक” यानी नकली सांप भी कहा गया।

इस जीव के दांत अंदर की ओर मुड़े हुए और बेहद नुकीले थे, जो इसे शिकार पकड़ने और चबाने में बेहद सक्षम बनाते थे। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह अपने समय के इकोसिस्टम का सबसे बड़ा शिकारी था, जो छोटे डायनासोर, स्तनधारी और अन्य सरीसृपों को शिकार बनाता था।
क्या यह डायनासोर से भी खतरनाक था?
हालांकि B. elgolensis डायनासोरों जितना बड़ा नहीं था, लेकिन यह अपनी तेजी, चालाकी और पैनी फुर्ती के कारण बेहद खतरनाक शिकारी था। इसके दांत और शिकार करने की शैली आधुनिक पायथन सांपों जैसी थी, जिससे यह अपने शिकार को फंसा कर आसानी से खा जाता था। इसका शारीरिक आकार छोटा जरूर था, लेकिन शिकार के लिए इसकी रणनीति और दांतों की बनावट अत्यंत घातक थी।
कहां और कब मिला इसका फॉसिल?
इस जीव का फॉसिल साल 2015 में स्कॉटलैंड के आइल ऑफ स्काई में खोजा गया था। इसकी खोज नेशनल म्यूजियम्स स्कॉटलैंड के जीवाश्म विशेषज्ञ स्टिग वॉल्श ने की थी। इसके बाद लगभग 10 साल तक इस पर गहन अध्ययन किया गया। रिसर्च के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि यह जीव Parviraptoridae नामक आदिम शिकारी जीवों के समूह से संबंधित था।
क्या इससे evolved हुए सांप?
कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि B. elgolensis जैसे जीवों से ही आगे चलकर आधुनिक सांपों का विकास हुआ। इसकी बनावट, दांतों की संरचना और शिकार करने की शैली सांपों से मेल खाती है। इसलिए यह जीव सांपों के पूर्वज की तरह माना जा सकता है।
Breugnathair elgolensis आकार में भले ही छोटा था, लेकिन यह 167 मिलियन साल पहले के जुरासिक युग का सबसे घातक शिकारी था। इस जीव की खोज ने वैज्ञानिकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि उस समय डायनासोर के अलावा भी और खतरनाक शिकारी धरती पर मौजूद थे। यह जीव न सिर्फ धरती के विकास की कहानी को एक नया मोड़ देता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि प्राकृतिक चयन और विकास कैसे कार्य करते हैं।
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