Mahadev Satta App Case : महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने विशाखापत्तनम की इंडिगो शिपिंग सर्विसेज से जुड़े चालू बैंक खाते को अनफ्रीज करने का आदेश दिया है। जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने निचली अदालत के उन आदेशों को निरस्त कर दिया, जिनके आधार पर खाते को फ्रीज रखने की कार्रवाई जारी थी। यह खाता रायपुर के खमतराई थाने में दर्ज महादेव ऐप से जुड़े अपराध की जांच के दौरान फ्रीज कराया गया था।
शाहिब खान और पत्नी ने दाखिल की थी याचिका
इस मामले में शाहिब खान और उनकी पत्नी सहर खान ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। दोनों का कहना था कि वे इंडिगो शिपिंग सर्विसेज के कारोबार से जुड़े हैं और विशाखापत्तनम स्थित ICICI बैंक में उनका चालू खाता नियमित व्यावसायिक लेन-देन के लिए इस्तेमाल होता है।याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, खमतराई पुलिस की कार्रवाई के बाद बैंक खाते पर डेबिट फ्रीज लगा दिया गया था। इससे कारोबार के सामान्य वित्तीय लेन-देन प्रभावित हो रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि उनका नाम न तो एफआईआर में आरोपी के रूप में शामिल है और न ही दाखिल चार्जशीट में। केवल एक व्यक्ति से कारोबारी लेन-देन होने के आधार पर खाते को लंबे समय तक बंद रखना उचित नहीं है।

साइबर फोरेंसिक जांच में क्या मिला?
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुलिस की साइबर फोरेंसिक रिपोर्ट का भी परीक्षण किया। यह रिपोर्ट 18 जुलाई 2026 को तैयार की गई थी। इसमें जब्त मोबाइल फोन और कंप्यूटर से प्राप्त डाटा की जांच की गई थी।रिपोर्ट के अनुसार, जांचे गए उपकरणों से महादेव ऐप और रेड्डी ऐप से संबंधित ऑनलाइन सट्टेबाजी के ऐप नहीं मिले। साथ ही WhatsApp के माध्यम से इन ऐप पर ऑनलाइन सट्टा खेलने या खिलवाने से जुड़े सबूत भी नहीं पाए गए। हालांकि, एक डिवाइस से विभिन्न बैंक खातों में पैसों के लेन-देन से संबंधित WhatsApp चैट मिलने की बात सामने आई।

पुलिस खाते से जुड़े लेन-देन का स्पष्ट ब्योरा नहीं दे सकी
राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई थी कि जांच के दौरान संदिग्ध वित्तीय लेन-देन सामने आए थे और खाते के जरिए महादेव ऐप से जुड़ी गतिविधियों में धन जमा तथा ट्रांसफर किए जाने की आशंका थी। पुलिस ने जांच के उद्देश्य से खाता फ्रीज कराया था।हालांकि, हाईकोर्ट ने पाया कि राज्य की ओर से कथित संदिग्ध लेन-देन की तारीख, रकम, लाभार्थियों और खाते में मौजूद संदिग्ध धनराशि का स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया। फोरेंसिक रिपोर्ट में भी यह साबित नहीं हुआ कि संबंधित रकम अपराध से प्राप्त धन थी।
निचली अदालत के आदेश हाईकोर्ट ने किए निरस्त
हाईकोर्ट ने कहा कि केवल किसी संदिग्ध व्यक्ति से कारोबारी संबंध होने के आधार पर किसी का बैंक खाता अनिश्चित समय तक फ्रीज नहीं रखा जा सकता। खाते को फ्रीज करने के लिए अपराध और संबंधित धनराशि के बीच सीधा संबंध दिखाने वाला पर्याप्त आधार होना जरूरी है।इसी आधार पर अदालत ने 3 सितंबर 2024 और 26 अक्टूबर 2024 के निचली अदालत के आदेश निरस्त कर दिए। पुलिस को संबंधित चालू खाते को तत्काल अनफ्रीज कराने के निर्देश दिए गए।

जांच एजेंसी के अधिकार पूरी तरह समाप्त नहीं
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जांच एजेंसी को किसी विशेष रकम के अपराध से जुड़े होने का ठोस प्रमाण मिलता है, तो वह कानून के अनुसार उस राशि को सुरक्षित रखने के लिए सक्षम मजिस्ट्रेट से आदेश मांग सकती है। हाईकोर्ट ने यह फैसला खाते को फ्रीज रखने की कार्रवाई की वैधता और उसके औचित्य के आधार पर दिया है। इससे महादेव ऐप मामले के अन्य आरोपों या जांच की अंतिम स्थिति पर कोई फैसला नहीं हुआ है।

