National Mourning
National Mourning: भारतीय संगीत जगत की अनमोल धरोहर और अपनी जादुई आवाज से सात दशकों तक श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करने वाली महान गायिका आशा भोसले अब हमारे बीच नहीं रहीं। उनके निधन की खबर ने न केवल फिल्म जगत बल्कि पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। मुंबई से आई इस हृदयविदारक खबर के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता तक, हर कोई अपनी प्रिय गायिका को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। दिग्गज हस्तियों ने उनके निधन को भारतीय संस्कृति और कला जगत के लिए एक ऐसी क्षति बताया है, जिसकी भरपाई कभी संभव नहीं हो सकेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आशा भोसले के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें ‘भारत की सबसे बहुमुखी आवाजों में से एक’ बताया। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी संवेदनाएं साझा कीं और आशा जी के साथ बिताए गए यादगार पलों की तस्वीरें भी पोस्ट कीं। उन्होंने लिखा कि आशा जी की संगीत यात्रा ने हमारी सांस्कृतिक विरासत को न केवल समृद्ध किया, बल्कि उसे वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुँचाया। पीएम मोदी ने कहा कि उनकी आवाज की चमक हमेशा बेमिसाल रही और उनके गाए गीत आने वाली कई पीढ़ियों को संगीत के प्रति प्रेरित करते रहेंगे।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आशा भोसले के निधन को मंगेशकर परिवार और पूरे देश के लिए एक गहरी क्षति बताया। उन्होंने लता दीदी को याद करते हुए कहा कि संगीत आकाश का दूसरा सबसे चमकता सितारा आज अस्त हो गया है। फडणवीस ने आशा जी की ऊर्जा की सराहना करते हुए बताया कि उन्होंने 90 वर्ष की आयु में भी 3 घंटे का लाइव कॉन्सर्ट कर दुनिया को अपनी जीवंतता का परिचय दिया था। उन्होंने विशेष रूप से आर.डी. बर्मन के साथ उनके ऐतिहासिक सहयोग का उल्लेख किया, जिसने भारतीय संगीत को एक नया ‘ज़ोन’ प्रदान किया था।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी पद्म विभूषण आशा भोसले को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने आशा जी के साथ अपने घनिष्ठ पारिवारिक संबंधों को याद करते हुए कहा कि उनकी विलक्षण प्रतिभा ने संगीत के क्षितिज पर एक अमिट पहचान बनाई है। गडकरी ने ‘नया दौर’ से लेकर ‘रंगीला’ तक की उनकी फिल्मों का जिक्र करते हुए कहा कि आशा जी ने समय के साथ अपनी गायकी को बदलकर हर पीढ़ी के साथ तालमेल बिठाया। उन्होंने प्रार्थना की कि ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और उनके करोड़ों प्रशंसकों को इस दुख को सहने की शक्ति दें।
आशा भोसले केवल एक पार्श्व गायिका नहीं थीं, बल्कि वह एक संस्था थीं। उन्होंने 20 से अधिक भारतीय भाषाओं में 12,000 से अधिक गानों को अपनी आवाज दी। शास्त्रीय संगीत की बारीकियों से लेकर पॉप, रॉक और कैबरे तक, उनकी आवाज हर सांचे में फिट बैठती थी। उनके निधन से संगीत का वह अध्याय बंद हो गया है जिसने भारतीय सिनेमा के उतार-चढ़ाव को अपनी धुनों से सजाया था। भले ही वह शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन ‘पिया तू अब तो आजा’, ‘दम मारो दम’ और ‘इन आंखों की मस्ती’ जैसे उनके अमर गीत हमेशा फिजाओं में गूंजते रहेंगे।
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