VP Election India : इंडी गठबंधन द्वारा पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद देश की सियासत में गर्माहट बढ़ गई है। कांग्रेस और बीजेपी के बीच इस मुद्दे पर जमकर बयानबाज़ी हो रही है। कांग्रेस नेता दीपक बैज और भूपेश बघेल ने बीजेपी पर करारा हमला बोला है, जबकि बीजेपी ने सुदर्शन रेड्डी पर नक्सल समर्थक होने का आरोप लगाया है।

कांग्रेस का पलटवार: “घबराई हुई है बीजेपी”
कांग्रेस नेता दीपक बैज ने कहा कि सुदर्शन रेड्डी की उम्मीदवारी से बीजेपी का राजनीतिक समीकरण बिगड़ गया है। उन्होंने कहा, “बीजेपी घबराहट में उल्टे-सीधे बयान दे रही है।” बैज ने याद दिलाया कि छत्तीसगढ़ में सलवा जुडूम के दौरान बीजेपी सरकार ने ग्रामीणों को बिना ट्रेनिंग के हथियार थमाए थे, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक बताया था। उन्होंने गृहमंत्री अमित शाह को नसीहत देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट का वह ऐतिहासिक फैसला एक बार फिर पढ़ें। बैज ने सवाल उठाया कि अगर उस समय का निर्णय बीजेपी को गलत लगा था, तो उसे कोर्ट में चुनौती क्यों नहीं दी गई?

“तड़ीपार गृहमंत्री बन सकता है, तो पूर्व जज उपराष्ट्रपति क्यों नहीं?”
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर लिखा, “जिस व्यक्ति को कभी तड़ीपार किया गया था, वह देश का गृहमंत्री बन सकता है, तो सुप्रीम कोर्ट में सेवा दे चुके पूर्व न्यायाधीश उपराष्ट्रपति क्यों नहीं बन सकते?” इस पर बीजेपी नेता राजीव अग्रवाल ने पलटवार करते हुए कहा कि जिस व्यक्ति को तड़ीपार कहा जा रहा है, उन्हें कोर्ट ने सम्मानपूर्वक बरी किया था। उन्होंने बघेल से तथ्यों को सही ढंग से प्रस्तुत करने की नसीहत दी।
बीजेपी के आरोप: “कांग्रेस का हाथ नक्सलियों के साथ”
बीजेपी प्रवक्ता देवलाल ठाकुर ने बी. सुदर्शन रेड्डी पर नक्सल समर्थक होने का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर सलवा जुडूम के खिलाफ फैसला नहीं आता, तो 2020 तक नक्सलवाद का सफाया हो चुका होता। ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस ने ऐसे व्यक्ति को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है, जिन्होंने नक्सल विरोधी अभियान को कमजोर किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस फैसले से आदिवासी समाज में नाराजगी है और कांग्रेस को जनता से माफी मांगनी चाहिए।
बी. सुदर्शन रेड्डी की उपराष्ट्रपति पद पर उम्मीदवारी से राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। जहां कांग्रेस इसे न्यायपालिका की गरिमा और संविधानिक मूल्यों का सम्मान बता रही है, वहीं बीजेपी इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और आदिवासी हितों के खिलाफ मान रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने की संभावना है।

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