Organic Farming : छत्तीसगढ़ के शिवरीनारायण में सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज ने विशेष बैलगाड़ी यात्रा निकालकर देश की खेती-किसानी और भविष्य की खाद्य सुरक्षा को लेकर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। इस यात्रा के माध्यम से उन्होंने कृषि व्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने और पारंपरिक खेती के तरीकों को सुरक्षित रखने का संदेश दिया। उन्होंने आधुनिक कृषि में डीजल, पेट्रोल, मशीनों और बाजार से मिलने वाले बीजों पर बढ़ती निर्भरता को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि खेती को केवल बाहरी संसाधनों और मशीनों के भरोसे छोड़ना भविष्य में चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
डीजल-पेट्रोल की आपूर्ति रुकी तो खेती पर क्या होगा असर?
सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज ने सवाल उठाया कि यदि किसी कारणवश एक साल तक डीजल की आपूर्ति बाधित हो जाए तो किसान खेतों की जुताई कैसे करेंगे और फसल उत्पादन किस तरह जारी रखेंगे? उन्होंने कहा कि आज कृषि का बड़ा हिस्सा ट्रैक्टर और दूसरी मशीनों पर निर्भर हो गया है। ऐसे में ईंधन की कमी होने पर खेती-किसानी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे खेती के पारंपरिक विकल्पों को पूरी तरह न छोड़ें और बैलों की उपयोगिता को भी समझें।

पारंपरिक बीज और बैलों के संरक्षण की अपील
गुरुदेव ने किसानों को अपने पारंपरिक बीजों को सुरक्षित रखने की सलाह दी। उनके मुताबिक, स्थानीय बीज और प्राकृतिक खेती की जानकारी आने वाले समय में किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। उन्होंने बैलों के संरक्षण पर भी जोर देते हुए कहा कि पहले कृषि व्यवस्था में बैलों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती थी। आधुनिक मशीनों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच इस पारंपरिक व्यवस्था को जीवित रखना जरूरी है। उनका संदेश है कि खेती के लिए ऐसे विकल्प भी तैयार रहने चाहिए, जो ईंधन और बाजार पर पूरी तरह निर्भर न हों।

आने वाले वर्षों में खाद्य संकट की जताई आशंका
सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज ने आने वाले दस वर्षों में संभावित खाद्य संकट को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति बन सकती है, जब लोगों के पास पैसा, सोना और चांदी तो होंगे, लेकिन पर्याप्त अनाज उपलब्ध कराना मुश्किल हो जाएगा। अपनी बात समझाने के लिए उन्होंने कहावत का उल्लेख किया, ‘बोरे भरकर नोट ले जाओगे तो मुट्ठी भर चावल और गेहूं लेकर आओगे।’ यह उनकी ओर से भविष्य की खाद्य सुरक्षा को लेकर जताई गई आशंका है।
जैविक खेती और प्राकृतिक भोजन अपनाने पर जोर
गुरुदेव ने खेती में रासायनिक पदार्थों के बढ़ते इस्तेमाल और स्वास्थ्य पर उनके संभावित प्रभावों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने प्राकृतिक भोजन, गौ-आधारित खेती और स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने की अपील की। उनका मानना है कि जैविक खेती मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में मददगार हो सकती है। उन्होंने किसानों से खेती में प्राकृतिक तरीकों को प्राथमिकता देने और रासायनिक इनपुट पर निर्भरता कम करने का आह्वान किया।

गौ-आधारित जैविक खेती का देशव्यापी अभियान शुरू करने का संकल्प
माता शबरी की पावन भूमि शिवरीनारायण से सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज ने गौ-आधारित जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए देशव्यापी अभियान शुरू करने की योजना बताई। उन्होंने किसानों से घरों में बीजों का संरक्षण करने, गौवंश की सेवा करने और पारंपरिक कृषि पद्धतियों को अपनाने की अपील की। इसके साथ ही उन्होंने प्राकृतिक चिकित्सालय और आराधनालय स्थापित करने की परिकल्पना भी साझा की।
‘अपना अन्न उगाओ, अपना खाओ’ का दिया संदेश
बैलगाड़ी यात्रा के जरिए गुरुदेव ने खेती को आत्मनिर्भर बनाने और स्थानीय स्तर पर खाद्यान्न उत्पादन को बढ़ावा देने का संदेश दिया। उन्होंने कहा, ‘अपना अन्न उगाओ, अपना खाओ। बैलों की सेवा आप करो, बैल आपकी सेवा करें।’ उनके अनुसार, पारंपरिक ज्ञान, प्राकृतिक संसाधनों और आधुनिक कृषि के बीच संतुलन बनाकर खेती को मजबूत किया जा सकता है। शिवरीनारायण से दिया गया यह संदेश किसानों के बीच जैविक खेती और खाद्य सुरक्षा पर चर्चा को आगे बढ़ाने का प्रयास है।


