Salman Khan Galwan Movie
Salman Khan Galwan Movie: बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की आगामी फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक और राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। चीन द्वारा फिल्म की विषयवस्तु पर उठाए गए सवालों के बीच केंद्र सरकार ने मंगलवार को एक कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। सरकार ने कहा कि भारत एक जीवंत लोकतंत्र है जहाँ ‘कलात्मक स्वतंत्रता’ (Artistic Freedom) का सम्मान किया जाता है। सरकार के अनुसार, भारतीय फिल्म निर्माताओं को अपनी रचनात्मकता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उपयोग करते हुए किसी भी विषय पर फिल्म बनाने का पूर्ण अधिकार है। यह बयान उन रिपोर्टों के बाद आया है जिनमें दावा किया गया था कि चीनी मीडिया फिल्म में दिखाए गए तथ्यों से नाखुश है।
यह फिल्म जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई ऐतिहासिक और भीषण झड़प पर आधारित है। फिल्म में सलमान खान ने 16 बिहार रेजिमेंट के वीर कमांडिंग ऑफिसर कर्नल बिक्कुमल्ला संतोष बाबू का किरदार निभाया है। कर्नल संतोष बाबू और उनके बहादुर जवानों ने चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के सैनिकों के साथ आमने-सामने की लड़ाई लड़ते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था। फिल्म के जरिए उस अदम्य साहस और राष्ट्रभक्ति के चित्रण की कोशिश की गई है, जिसने गलवान घाटी में चीनी घुसपैठ को नाकाम कर दिया था।
गलवान झड़प के बाद से ही दोनों देशों के बीच दावों को लेकर विवाद बना हुआ है। भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर और पूरी पारदर्शिता के साथ स्वीकार किया है कि इस संघर्ष में भारतीय सेना के 20 जांबाज सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए थे। इसके विपरीत, बीजिंग का रवैया शुरू से ही टालमटोल वाला रहा। पहले तो चीन ने अपने सैनिकों के हताहत होने की खबर से पूरी तरह इनकार किया, लेकिन बाद में वैश्विक दबाव के बीच दावा किया कि उसने केवल चार सैनिक खोए। रक्षा विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय खुफिया रिपोर्टों ने हमेशा चीन के इन आंकड़ों को वास्तविकता से बहुत कम और ‘तथ्यों के साथ छेड़छाड़’ बताया है।
चीन के सरकारी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने एक लेख के जरिए फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ पर निशाना साधा है। चीनी प्रोपेगेंडा मशीनरी ने आरोप लगाया है कि फिल्म में दिखाई गई घटनाएं “तथ्यों से मेल नहीं खातीं”। लेख में कहा गया कि बॉलीवुड फिल्में अक्सर भावनात्मक रूप से आवेशित होती हैं और मनोरंजन के लिए इतिहास को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करती हैं। चीन का दावा है कि कोई भी ‘सिनेमाई अतिशयोक्ति’ इतिहास को नहीं बदल सकती और न ही अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए पीएलए के दृढ़ संकल्प को कम कर सकती है। चीन की यह प्रतिक्रिया दर्शाती है कि फिल्म के माध्यम से वैश्विक मंच पर उसकी सच्चाई आने से वह डरा हुआ है।
चीनी चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत सरकार से जुड़े सूत्रों ने एनडीटीवी को बताया कि भारत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता वाला देश है और सिनेमाई अभिव्यक्ति इसका अभिन्न हिस्सा है। सूत्र ने स्पष्ट किया कि इस फिल्म के निर्माण में सरकार की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है, यह पूरी तरह से एक निजी कलात्मक प्रयास है। सरकार ने कड़े शब्दों में कहा कि जिन लोगों या देशों को इस फिल्म के तथ्यों को लेकर कोई भी आपत्ति या शंका है, वे स्पष्टीकरण के लिए भारत के रक्षा मंत्रालय से संपर्क करने के लिए स्वतंत्र हैं। भारत अपनी संप्रभुता और अपने वीरों की गाथाओं को कहने के अधिकार के साथ मजबूती से खड़ा है।
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