SIR Voter List 2026 : उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वोटर्स की संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। चुनाव आयोग और संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, इन पांच राज्यों में SIR से पहले करीब 18.71 करोड़ मतदाता दर्ज थे। अंतिम मतदाता सूची में यह संख्या घटकर लगभग 16.43 करोड़ रह गई है। इस तरह करीब 2.28 करोड़ मतदाताओं की कमी दर्ज की गई है। प्रतिशत के हिसाब से यह गिरावट लगभग 12.2 फीसदी बैठती है।
उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा कम हुए वोटर्स
पांचों राज्यों में मतदाता सूची के पुनरीक्षण का सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश में दिखाई दिया है। कुल गिरावट का बड़ा हिस्सा अकेले यूपी से जुड़ा है। राज्य में SIR से पहले करीब 15.44 करोड़ मतदाता थे। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद यह संख्या घटकर लगभग 12.56 करोड़ रह गई थी। इसके बाद दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के दौरान कई नाम दोबारा शामिल किए गए और अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या बढ़कर करीब 13.40 करोड़ हो गई।

इस तरह उत्तर प्रदेश की अंतिम मतदाता सूची में पहले के मुकाबले लगभग 2.04 करोड़ मतदाता कम दर्ज हुए। यह शुरुआती मतदाता संख्या का करीब 13.2 फीसदी है। ड्राफ्ट सूची से हटाए गए लगभग 2.89 करोड़ नामों में से करीब 84 लाख नाम दोबारा जोड़ दिए गए। यानी हटाए गए नामों में लगभग 29 फीसदी की रिकवरी हुई।

पंजाब में 14 लाख मतदाताओं की कमी
पंजाब में SIR के बाद मतदाताओं की संख्या में करीब 14 लाख की गिरावट बताई गई है। पुनरीक्षण से पहले राज्य में लगभग 2.15 करोड़ वोटर्स थे। ड्राफ्ट सूची में यह आंकड़ा घटकर करीब 1.94 करोड़ हो गया। दावे और आपत्तियों के बाद अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या बढ़कर लगभग 2.01 करोड़ पहुंच गई। ड्राफ्ट सूची से हटाए गए करीब 21 लाख नामों में से लगभग 7 लाख नाम फिर से जोड़े गए। पांचों राज्यों में पंजाब में दोबारा नाम शामिल होने की अच्छी रिकवरी देखने को मिली।
उत्तराखंड में करीब आठ लाख वोटर्स घटे
उत्तराखंड में SIR के बाद मतदाताओं की संख्या लगभग 80 लाख से घटकर अंतिम सूची में 72 लाख रह गई। इस तरह राज्य में करीब आठ लाख मतदाताओं की कमी दर्ज की गई। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, ड्राफ्ट सूची से हटाए गए नामों में से बहुत कम मतदाताओं के नाम दोबारा शामिल हो पाए। इससे राज्य में रिकवरी का प्रतिशत अन्य राज्यों की तुलना में कम रहा।

मणिपुर में भी मतदाता सूची से घटे नाम
मणिपुर में पुनरीक्षण से पहले करीब 20.9 लाख मतदाता दर्ज थे। ड्राफ्ट सूची में यह संख्या घटकर लगभग 19.3 लाख हो गई। अंतिम सूची में कुछ नामों की वापसी के बाद आंकड़ा बढ़कर करीब 19.6 लाख पहुंचा। इसके बावजूद राज्य में पहले की तुलना में मतदाताओं की संख्या कम रही। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, ड्राफ्ट सूची से हटाए गए लगभग 17 फीसदी नाम दोबारा जोड़े गए।
गोवा में अंतिम सूची में भी कम हुए वोटर्स
गोवा में SIR के बाद मतदाताओं की संख्या 11.85 लाख से घटकर ड्राफ्ट सूची में 10.85 लाख रह गई थी। अंतिम सूची में यह आंकड़ा और कम होकर लगभग 10.58 लाख पहुंच गया। इस तरह राज्य में करीब 1.27 लाख मतदाताओं की कमी दर्ज हुई। खास बात यह है कि गोवा पांचों राज्यों में ऐसा राज्य बताया गया है, जहां अंतिम सूची में ड्राफ्ट सूची के मुकाबले भी मतदाताओं की संख्या कम रही।
चुनाव आयोग ने 17 राज्यों में शुरू कराया SIR
चुनाव आयोग ने देश के 17 राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का आदेश दिया था। आयोग के अनुसार, इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अपडेट करना है। इसके तहत छूटे हुए पात्र मतदाताओं को नाम जुड़वाने का अवसर दिया जाता है। वहीं, निर्धारित नियमों के अनुसार अपात्र, मृत, स्थानांतरित या अन्य कारणों से हटाए जाने वाले नामों की जांच की जाती है।
2027 में पांच राज्यों में होने हैं विधानसभा चुनाव
उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 को समाप्त होगा। वहीं, मणिपुर की 60, गोवा की 40, पंजाब की 117 और उत्तराखंड की 70 सदस्यीय विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च 2027 में अलग-अलग तारीखों पर पूरा होगा।
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के प्रावधानों के तहत चुनाव आयोग को विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव कराने का अधिकार है। ऐसे में चुनाव से पहले मतदाता सूची का पुनरीक्षण राजनीतिक और चुनावी लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


