Swollen Feet Causes
Swollen Feet Causes: पैरों में सूजन एक ऐसी स्थिति है जिसे अधिकांश लोग दिनभर की भागदौड़, थकान या बढ़ती उम्र का सामान्य प्रभाव मानकर टाल देते हैं। अक्सर ऑफिस में घंटों बैठकर काम करने या लंबे समय तक खड़े रहने के बाद शाम को पैरों में भारीपन महसूस होना स्वाभाविक लग सकता है। शुरुआत में यह सूजन बहुत मामूली होती है, लेकिन जब यह बार-बार होने लगे या लंबे समय तक बनी रहे, तो यह शरीर के आंतरिक अंगों में हो रही किसी बड़ी गड़बड़ी का इशारा हो सकती है। कई बार लोगों को इसका आभास तब होता है जब उनके जूते टाइट होने लगते हैं या टखनों के पास त्वचा पर मोजों के गहरे निशान छपने लगते हैं।
आरएमएल हॉस्पिटल के मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञ डॉ. सुभाष गिरि के अनुसार, पैरों में सूजन (Edema) के पीछे कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं। हर बार यह किसी जानलेवा बीमारी का संकेत नहीं होती, लेकिन इसके कारणों को समझना अनिवार्य है।
जीवनशैली और खानपान: भोजन में नमक की अधिक मात्रा शरीर में पानी को रोकने (Water Retention) का काम करती है, जिससे सूजन आती है।
शारीरिक गतिविधियाँ: एक ही मुद्रा में घंटों बैठे रहने या खड़े रहने से रक्त का प्रवाह बाधित होता है।
गठिया और जोड़ों की समस्या: आर्थराइटिस के मरीजों में अक्सर सुबह के समय टखनों और जोड़ों के पास सूजन, दर्द और जकड़न देखी जाती है।
अंगों की कार्यक्षमता: हार्ट, किडनी या लिवर से जुड़ी समस्याओं में शरीर तरल पदार्थों को सही ढंग से बाहर नहीं निकाल पाता, जिसका असर सबसे पहले पैरों पर दिखता है।
पैरों की सूजन कब ‘सामान्य’ से ‘खतरनाक’ श्रेणी में आ जाती है, इसकी पहचान करना जीवन रक्षक साबित हो सकता है। यदि सूजन के साथ निम्नलिखित लक्षण दिखाई दें, तो तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लें:
एकतरफा सूजन: यदि केवल एक पैर में अचानक सूजन आ जाए और वह हिस्सा लाल या गर्म महसूस हो, तो यह ‘डीप वेन थ्रोम्बोसिस’ (नसों में खून का थक्का जमना) हो सकता है।
सांस लेने में तकलीफ: पैरों में सूजन के साथ यदि सीने में दर्द या सांस फूलने की समस्या हो, तो यह दिल की कमजोरी (Heart Failure) का लक्षण हो सकता है।
किडनी की समस्या: अगर सुबह सोकर उठने के बाद भी सूजन कम नहीं हो रही है या चेहरे और आंखों के पास भी भारीपन है, तो यह किडनी की बीमारी का संकेत हो सकता है।
महिलाओं में अक्सर गर्भावस्था या मासिक धर्म के दौरान होने वाले हार्मोनल परिवर्तनों के कारण भी पैरों में सूजन की शिकायत रहती है। इसके अलावा, उच्च रक्तचाप (बीपी), स्टेरॉयड या कुछ विशेष पेनकिलर दवाओं के नियमित सेवन से भी शरीर के निचले हिस्सों में सूजन आ सकती है। नसों की कमजोरी (Varicose Veins) के कारण भी खून ऊपर की ओर ठीक से पंप नहीं हो पाता, जिससे तरल पदार्थ पैरों में जमा होने लगता है।
पैरों की सूजन को कम करने और इससे बचने के लिए अपनी दिनचर्या में छोटे लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव किए जा सकते हैं:
सक्रिय रहें: लंबे समय तक बैठने के दौरान हर एक घंटे में 5 मिनट का वॉक करें।
पैरों की पोजीशन: सोते समय या आराम करते समय पैरों के नीचे तकिया लगाकर उन्हें हृदय के स्तर से थोड़ा ऊपर रखें।
नमक पर नियंत्रण: प्रोसेस्ड फूड और ऊपर से नमक डालकर खाने की आदत छोड़ें।
व्यायाम: नियमित रूप से स्ट्रेचिंग और पैदल चलने से रक्त संचार बेहतर होता है।
सही फुटवियर: बहुत टाइट या ऊँची हील वाले जूतों के बजाय आरामदायक और सही फिटिंग के जूते पहनें।
पैरों की सूजन को केवल थकान मान लेना स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही हो सकती है। यदि घरेलू उपायों और आराम के बावजूद सूजन बनी रहती है, तो यह समय है कि आप किसी विशेषज्ञ से अपनी जांच कराएं। समय पर की गई डायग्नोसिस न केवल आपको दर्द से राहत दिलाएगी, बल्कि भविष्य की किसी बड़ी मेडिकल इमरजेंसी से भी बचा सकती है।
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