US Iran Deal : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ एक ऐतिहासिक समझौते की घोषणा के बाद दुनिया भर के बाजारों और ऊर्जा क्षेत्र में राहत की उम्मीद जगी है। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि दोनों देशों के बीच चल रहे लंबे सैन्य संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक शांति समझौते को अंतिम रूप दे दिया गया है। इस ऐतिहासिक समझौते पर आगामी 19 जून को स्विट्जरलैंड में आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस शांति पहल का पुरजोर स्वागत किया है, जिससे वैश्विक स्तर पर स्थिरता आने की उम्मीद है।

ईंधन आपूर्ति पर भारत सरकार का रुख और घरेलू बाजार की स्थिति
इस बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के बीच भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देशवासियों को आश्वस्त करते हुए एक अहम बयान जारी किया है। मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि देश में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (LPG) की आपूर्ति पूरी तरह से स्थिर है। भारत की सभी रिफाइनरियां इस समय अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार सुरक्षित है। कुछ चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर भीड़ बढ़ने का कारण यह है कि बड़े औद्योगिक और कमर्शियल ग्राहक भी अब रिटेल आउटलेट्स से ईंधन खरीद रहे हैं।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से हटेगी नाकेबंदी, भारतीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया कि इस डील के तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बिना किसी टोल या टैक्स के वैश्विक व्यापार के लिए खोल दिया जाएगा। अमेरिकी नौसेना को नाकेबंदी हटाने के आदेश भी दे दिए गए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच चले 107 दिनों के इस तनाव के खत्म होने से भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिलेगी। होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने से पश्चिम एशिया को होने वाले भारतीय निर्यात में तेजी आएगी, देश में मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां बढ़ेंगी और भारतीय रुपये को भी मजबूती मिलेगी।
संघर्ष के कारण कच्चे तेल में उछाल और खाड़ी देशों से आयात में कमी
बता दें कि इस साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ शुरू किए गए सैन्य अभियान के बाद कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई थीं। इस अशांति का सीधा असर भारत के विदेशी व्यापार पर पड़ा था। मार्च महीने में भारत का निर्यात 7.44 प्रतिशत घटकर 38.92 अरब डॉलर रह गया था, जो पिछले पांच महीनों की सबसे बड़ी गिरावट थी। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, इस तनावपूर्ण अवधि के दौरान खाड़ी देशों से होने वाले आयात में भी 51.64 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई थी।
खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों के साथ भारत का व्यापारिक गणित
खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों के साथ भारत के व्यापारिक आंकड़े उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का निर्यात 1% बढ़कर 57 अरब डॉलर रहा था, जबकि आयात 15.33% बढ़कर 121.7 अरब डॉलर पर पहुँच गया था। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बना हुआ है। इसके बाद के वर्ष 2025-26 में भारत का यूएई को निर्यात 37.4 अरब डॉलर और आयात 63.9 अरब डॉलर दर्ज किया गया, जिससे भारत को करीब 26.53 अरब डॉलर का व्यापार घाटा उठाना पड़ा था।

सऊदी अरब, कतर और अन्य खाड़ी सहयोगियों के साथ व्यापार घाटे का ब्योरा
सऊदी अरब भारत का पांचवां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा, जहाँ भारत का निर्यात 12.55% घटकर 110.28 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 30.8 अरब डॉलर रहा। इसी तरह कतर को होने वाला निर्यात 3.7% घटकर 1.62 अरब डॉलर और आयात 12.3 अरब डॉलर रहा, जिससे घाटा 10.7 अरब डॉलर का रहा। ओमान के साथ व्यापार में भारत का निर्यात 4.02 अरब डॉलर और आयात 7.16 अरब डॉलर रहा। इसके अतिरिक्त कुवैत से 6.26 अरब डॉलर और बहरीन से 10.87 करोड़ डॉलर का व्यापार घाटा भारत को हुआ, जिसमें अब इस शांति समझौते के बाद सुधार की उम्मीद है।
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