Vaishno Devi Shrine : जम्मू-कश्मीर स्थित पवित्र श्री माता वैष्णो देवी दरबार में श्रद्धा के नाम पर एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार, भक्तों द्वारा मंदिर में चढ़ाई गई 20 टन से अधिक चांदी में बड़े पैमाने पर मिलावट पाई गई है। बाजार में इस चांदी की अनुमानित कीमत करीब 550 करोड़ रुपये थी। यह घोटाला तब प्रकाश में आया जब श्राइन बोर्ड ने चढ़ावे के रूप में प्राप्त इस चांदी को गलाने के लिए भेजा। जांच में पता चला कि इसमें मात्र 5 से 6 प्रतिशत ही वास्तविक चांदी मौजूद थी, जबकि शेष हिस्सा लोहा और कैडमियम जैसे अन्य धातुएं थीं। यह खुलासा होने के बाद देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को गहरा धक्का लगा है।

कानूनी लड़ाई और अदालत का बड़ा हस्तक्षेप
इस गंभीर मामले के सामने आने के बाद, जम्मू के अधिवक्ता दीपक शर्मा ने 9 मई को पुलिस महानिरीक्षक (क्राइम ब्रांच) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने मांग की थी कि मामले की गहराई से जांच हो और संबंधित दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। अधिवक्ता ने आशंका जताई थी कि भक्तों द्वारा चढ़ाई गई असली चांदी की अदला-बदली की गई है या फिर सुनियोजित तरीके से इसमें मिलावट की गई है। जब पुलिस की ओर से जांच में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई गई, तो पीड़ित पक्ष ने न्याय की उम्मीद में अदालत का दरवाजा खटखटाया।

क्राइम ब्रांच की रिपोर्ट पर कोर्ट ने उठाए सवाल
अदालत के निर्देश पर क्राइम ब्रांच ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट पेश की, जिसमें बताया गया कि मामले को श्रीनगर स्थित क्राइम मुख्यालय की मंजूरी के बाद जोनल पुलिस मुख्यालय जम्मू को स्थानांतरित कर दिया गया है। इस रिपोर्ट पर याचिकाकर्ता ने कड़ी आपत्ति जताई। उनका तर्क था कि आर्थिक अपराध शाखा (EOW) के पास अपना थाना मौजूद है, फिर भी शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय इसे टालने की कोशिश की जा रही है। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि रिपोर्ट में साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए अपनाई गई प्रक्रियाओं का कोई उल्लेख नहीं है, जो जांच की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।
29 जुलाई को पेश होना होगा जांच अधिकारी को
मामले की गंभीरता को देखते हुए जम्मू के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (CJM) ने इस पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने जांच अधिकारी को निर्देश दिया है कि वे 29 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हों। साथ ही, अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि इस पूरे मामले से संबंधित संपूर्ण रिकॉर्ड अगली सुनवाई में कोर्ट के समक्ष पेश किया जाए। कोर्ट की इस सख्ती ने पुलिस प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है, क्योंकि अब उन्हें इस बहुचर्चित घोटाले की जांच रिपोर्ट और कार्रवाई का ब्यौरा अदालत के सामने रखना होगा।
आस्था बनाम भ्रष्टाचार की लड़ाई
श्री माता वैष्णो देवी मंदिर का यह प्रकरण अब केवल प्रशासनिक जांच का विषय नहीं रहा, बल्कि यह करोड़ों लोगों की आस्था और मंदिर की पवित्रता से जुड़ गया है। क्या इतने बड़े स्तर पर चांदी की मिलावट बिना किसी मिलीभगत के संभव थी? यह एक ऐसा बड़ा सवाल है जिसका उत्तर जांच के बाद ही मिल पाएगा। फिलहाल, आम जनता की निगाहें कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां से यह स्पष्ट होगा कि इस 550 करोड़ के घोटाले के पीछे के असली चेहरे कौन हैं।
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