Governor vs Government: राज्यपाल बनाम सरकार विवाद, सुप्रीम कोर्ट में 7वें दिन की सुनवाई पूरी, राज्य सरकारों ने दी अहम दलीलें

Governor vs Government: सुप्रीम कोर्ट में प्रेसिडेंशियल रेफरेंस मामले पर बुधवार को सातवें दिन की सुनवाई पूरी हुई। इस बहुचर्चित मामले में अब तक कई राज्य सरकारें अपनी-अपनी दलीलें पेश कर चुकी हैं। ताजा सुनवाई में कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और हिमाचल प्रदेश की सरकारों ने अपना पक्ष रखा और संविधान में राज्यपाल की भूमिका को “नाममात्र का प्रमुख” करार दिया।

ads

इस संवैधानिक बहस की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ कर रही है, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस बीआर गवई कर रहे हैं। मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर 2025 को निर्धारित की गई है।

Adst

क्या कहा कर्नाटक सरकार ने?

कर्नाटक सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रमण्यम ने दलील देते हुए कहा कि “1954 से ही संविधानिक व्यवस्था यह रही है कि राष्ट्रपति और राज्यपाल दोनों नाममात्र के प्रमुख हैं।”उन्होंने यह भी कहा कि यदि मंत्रिमंडलीय शासन प्रणाली ही संसदीय लोकतंत्र का मूल है, तो हमें यह स्पष्ट करना होगा कि राष्ट्रपति और राज्यपाल की भूमिका वास्तव में क्या है। सुब्रमण्यम ने कहा कि जब तक यह स्पष्ट नहीं होगा, तब तक अनुच्छेद 200 और उससे जुड़े प्रश्नों का उत्तर देना संभव नहीं है।

Adst

तमिलनाडु और अन्य राज्यों का भी कड़ा रुख

इससे पहले तमिलनाडु सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी थी कि “राज्यपाल और मुख्यमंत्री एक म्यान में दो तलवार नहीं हो सकते।” उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्यपाल केवल एक सूत्रधार (facilitator) होते हैं, न कि हस्तक्षेप करने वाले अधिकारी। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यपाल कभी-कभी अराजकता और संवैधानिक भ्रम पैदा करने की कोशिश करते हैं। पश्चिम बंगाल सरकार ने भी इस बात पर सहमति जताई कि राज्यपालों को संविधान की सीमाओं में रहकर ही काम करना चाहिए।

क्या है पूरा मामला?

यह प्रेसिडेंशियल रेफरेंस राज्यपालों द्वारा विधानसभा से पारित विधेयकों को मंजूरी देने में अनावश्यक देरी, संवैधानिक जिम्मेदारियों की अनदेखी और राजनीतिक टकराव से जुड़ा है। मामला तब सामने आया जब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को कई पत्र लिखकर राज्यपाल आरएन रवि के व्यवहार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यपाल सरकार के कार्यों में अवरोध डाल रहे हैं और अनुच्छेद 163(1) का उल्लंघन कर रहे हैं, जो कहता है कि राज्यपाल को मंत्रिपरिषद की सलाह का पालन करना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट में चल रही यह सुनवाई भारत के संवैधानिक ढांचे में राज्यपाल की भूमिका को लेकर एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है। राज्यों और राज्यपालों के बीच बढ़ते टकराव के बीच, यह फैसला यह स्पष्ट कर सकता है कि लोकतांत्रिक शासन में निर्वाचित सरकार की सलाह को कितना महत्व मिलना चाहिए।

Read More  : Minor Kills Beggar: नासिक में नाबालिग ने भिखारी को पत्थर से मार डाला, शव के पास खड़ा होकर किया डांस, वीडियो वायरल

Adst
Admin

Admin

Writer & Blogger

All Posts
Previous Post
Next Post

ताज़ा खबरे

  • All Posts
  • FIFA World Cup 2026
  • Thetarget365
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अन्य
  • अपराध
  • कारोबार
  • कृषि
  • खेल
  • छत्तीसगढ़
  • टेक
  • ट्रेंड
  • ताज़ा खबर
  • धर्म
  • पशु-पक्षी
  • मनोरंजन
  • मौसम
  • राजनीति
  • राष्ट्रीय
  • विचार/लेख
  • शिक्षा और नौकरी
  • साहित्य/मीडिया
  • सेहत-फिटनेस

© 2026 | All Rights Reserved | Thetarget365.com | Made By Top News Portal Development Company

Contacts

Call Us At – +91-:9406130006
WhatsApp – +91 62665 68872
Mail Us At – thetargetweb@gmail.com
Meet Us At – Shitla Ward, Ambikapur Dist. Surguja Chhattisgarh.497001.