Amit Shah Bastar visit: छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में आयोजित होने वाले विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा महोत्सव में इस बार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति खास आकर्षण होगी। 4 अक्टूबर को वे प्रदेश प्रवास पर रहेंगे और जगदलपुर में आयोजित मुरिया दरबार में शामिल होकर आदिवासी प्रतिनिधियों से संवाद करेंगे। बस्तर दशहरा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आदिवासी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण है। इस आयोजन को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है। हाल ही में नई दिल्ली में बस्तर दशहरा समिति के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भेंट कर उन्हें इस महोत्सव में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया।

प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व बस्तर सांसद और दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप ने किया, जिसमें मांझी-चालकी समेत अन्य परंपरागत प्रतिनिधि भी शामिल थे। इस अवसर पर समिति ने गृहमंत्री को मां दंतेश्वरी की पवित्र तस्वीर भी भेंट की।

अमित शाह ने की परंपराओं की सराहना
अमित शाह ने निमंत्रण स्वीकार करते हुए बस्तर दशहरा की सांस्कृतिक गरिमा की सराहना की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा “बस्तर अब नक्सलवाद की गिरफ्त से निकलकर शांति और विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। मैं इस 75 दिवसीय अद्वितीय पर्व में शामिल होने के लिए उत्साहित हूं।”
मुरिया दरबार में रखी जाएंगी समस्याएं
4 अक्टूबर को सिरहासार भवन, जगदलपुर में आयोजित मुरिया दरबार के दौरान, बस्तर क्षेत्र के आदिवासी समुदाय के लोग प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने अपनी समस्याएं, सुझाव और परंपरागत मांगें रखेंगे। यह दरबार बस्तर की प्रशासनिक और सांस्कृतिक संरचना का अहम हिस्सा है। अमित शाह इस मौके पर मिशन 2026 के अंतर्गत नक्सल उन्मूलन अभियान की प्रगति की समीक्षा भी करेंगे। इसमें राज्य के मुख्यमंत्री, गृहमंत्री और उच्च अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।
स्वदेशी मेला को मिलेगा राष्ट्रीय मंच
इस दौरे के दौरान आयोजित स्वदेशी मेला में स्थानीय हस्तशिल्प, कलाकृतियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को राष्ट्रीय मंच पर लाने की पहल की जाएगी। इससे न केवल बस्तर की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय कारीगरों और कलाकारों को आर्थिक संबल भी मिलेगा।
प्रधानमंत्री को भी भेजा गया निमंत्रण
बस्तर दशहरा समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी आमंत्रण भेजा है। सांसद महेश कश्यप ने कहा”यह ऐतिहासिक क्षण है जब बस्तर की संस्कृति को देशभर में सम्मान मिल रहा है।” गौरतलब है कि बस्तर दशहरे की सबसे बड़ी खासियत है कि इसमें रावण दहन नहीं किया जाता, बल्कि मां दंतेश्वरी की आराधना और पारंपरिक अनुष्ठानों के माध्यम से यह महोत्सव आयोजित होता है।











