CTI Letter : चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों के प्रसारण के दौरान ‘एडल्ट’ श्रेणी के विज्ञापनों को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने इस संबंध में आईसीसी (ICC) के चेयरमैन जय शाह को एक पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन ने मांग की है कि क्रिकेट मैचों के दौरान कंडोम, डेटिंग ऐप्स और इसी तरह के अन्य विज्ञापनों के प्रसारण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। सीटीआई का तर्क है कि क्रिकेट भारत में एक ऐसा खेल है जिसे करोड़ों लोग अपने पूरे परिवार के साथ मिलकर देखते हैं, और ऐसे विज्ञापनों का प्रसारण पारिवारिक माहौल में काफी असहजता पैदा करता है।

4 जुलाई के मैच में प्रसारित विज्ञापन से उठा विवाद
यह पूरा विवाद 4 जुलाई 2026 को इंग्लैंड के मैनचेस्टर में खेले गए भारत और इंग्लैंड के दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच के दौरान सामने आया। सीटीआई के अनुसार, मैच के दौरान ओवरों के बीच ‘ड्यूरेक्स कंडोम’ का विज्ञापन दिखाया गया था। संगठन का कहना है कि जब करोड़ों प्रशंसक अपने घर में बच्चों और बड़ों के साथ लाइव मैच देख रहे थे, तब इस तरह के विज्ञापन का दिखना एक गंभीर मुद्दा है। सीटीआई ने बृजेश गोयल के व्यक्तिगत अनुभव का हवाला देते हुए बताया कि मैच देखते समय उनके 13 वर्षीय पुत्र ने विज्ञापन को लेकर सवाल किए, जिससे उन्हें काफी असहजता का सामना करना पड़ा। संगठन का मानना है कि देशभर में लाखों परिवारों को ऐसी ही स्थिति से गुजरना पड़ता है।


‘फैमिली व्यूइंग कोड’ और सख्त गाइडलाइन की मांग
सीटीआई ने अपनी मांग को स्पष्ट करते हुए कहा है कि शाम 7 बजे से रात 11 बजे तक के ‘फैमिली व्यूइंग टाइम’ के दौरान इस प्रकार की विज्ञापन सामग्री पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए। संगठन ने आईसीसी से अनुरोध किया है कि वे इस संबंध में स्पष्ट गाइडलाइन जारी करें। इसके अलावा, सीटीआई ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और अन्य सदस्य बोर्डों से यह मांग की है कि वे अपने ब्रॉडकास्ट पार्टनर्स के साथ होने वाले अनुबंधों में ‘फैमिली व्यूइंग कोड’ को अनिवार्य रूप से शामिल करें। सीटीआई ने तर्क दिया है कि जब शराब और तंबाकू उत्पादों के विज्ञापनों पर देश में पहले से ही प्रतिबंध है, तो एडल्ट श्रेणी के विज्ञापनों को लाइव खेल के दौरान दिखाना न्यायोचित नहीं है।
भविष्य में नियमों का उल्लंघन होने पर सख्त कार्रवाई की अपील
सीटीआई ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि इस मांग के बाद भी विज्ञापन जारी रहते हैं, तो संबंधित ब्रॉडकास्टर्स और क्रिकेट बोर्डों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। संगठन ने जय शाह से आग्रह किया है कि वे इस संवेदनशील विषय को आगामी आईसीसी बोर्ड बैठक में सर्वोच्च प्राथमिकता दें। सीटीआई ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा को सर्वोपरि बताते हुए 30 दिनों के भीतर इस दिशा में ठोस नीति बनाने की मांग की है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी जाती हैं, तो वे इस मुद्दे को भारतीय संसद और केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के समक्ष भी मजबूती से उठाएंगे।












