Ram Mandir Case : राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में टिन्नू यादव और सुभाष की सात दिन की रिमांड की मांग

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। पुलिस ने चंपत राय के करीबी बताए जा रहे टिन्नू यादव और सुभाष की सात दिन की रिमांड मांगी है। एसआईटी मनी ट्रेल की गहन जांच में जुटी है। आखिर कौन से नए राज़ सामने आ सकते हैं? जानिए पूरी रिपोर्ट।

Ram Mandir Case : अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन के मामले में जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। SIT ने जेल में बंद दो मुख्य आरोपियों—राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और सुभाष श्रीवास्तव—की सात दिनों की पुलिस हिरासत (रिमांड) के लिए विशेष अदालत में अर्जी दाखिल की है। जांच एजेंसियों का मानना है कि गबन की परतें खोलने और इस घोटाले से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्यों को बरामद करने के लिए दोनों आरोपियों से हिरासत में लेकर विस्तृत पूछताछ करना अनिवार्य है।

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14 जुलाई को होगी सुनवाई: विशेष अदालत ने तय की तारीख

जांच अधिकारी आशुतोष तिवारी के अनुरोध पर, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से संबंधित मामलों को देखने वाली विशेष अदालत में यह याचिका पेश की गई। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सुनवाई के लिए 14 जुलाई की तारीख मुकर्रर की है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, पिछले दिनों हुई पूछताछ में कुछ अहम सुराग मिले हैं, जिनकी पुष्टि होना बाकी है। पुलिस का स्पष्ट मानना है कि यदि ये दोनों आरोपी हिरासत में मिलते हैं, तो मंदिर की दान पेटियों से हुई हेराफेरी के नेटवर्क का पूरा सच सामने आ पाएगा।

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घोटाले का पर्दाफाश: कौन हैं मुख्य आरोपी और उनकी भूमिका

पुलिस जांच में सामने आया है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के पूर्व ड्राइवर, राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के पास मंदिर की दान पेटियों की चाबियां रहती थीं। वहीं, दूसरे आरोपी सुभाष श्रीवास्तव एक पूर्व बैंक कर्मचारी हैं, जो दान राशि की गिनती और उसके प्रबंधन में सक्रिय थे। गौरतलब है कि इस गबन विवाद के सामने आने के बाद चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इस पूरे मामले में अब तक ट्रस्ट के कर्मचारियों समेत कुल आठ लोग सलाखों के पीछे हैं।

SIT की पैनी नजर: मनी ट्रेल और बेहिसाब संपत्ति की जांच

जांच एजेंसियां इस घोटाले के ‘मनी ट्रेल’ (पैसे के लेन-देन) को खंगालने में जुटी हैं। SIT गिरफ्तार आरोपियों, उनके परिजनों के बैंक खातों, हालिया निवेश और संपत्ति की खरीद-फरोख्त की गहन जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि गबन की रकम कहाँ-कहाँ खपाई गई। इससे पहले, आरोपी अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडे को रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई थी, जिसके दौरान एक कार, कुछ आभूषण और उस स्थान की पहचान हुई थी जहाँ पैसों का बंटवारा होता था। जांच में बरामद की गई सभी सामग्रियों को अदालत में पेश कर रिकॉर्ड का हिस्सा बना दिया गया है।

प्रशासनिक कार्रवाई और मंदिर प्रबंधन में सुरक्षा के सख्त इंतजाम

आरोपियों के खिलाफ केवल पुलिस ही नहीं, बल्कि अयोध्या विकास प्राधिकरण भी सख्ती बरत रहा है। आरोपी लवकुश मिश्रा से जुड़े एक निर्माणाधीन भवन को लेकर प्राधिकरण ने नोटिस जारी किया था, क्योंकि वह बिना स्वीकृत नक्शे के बन रहा था। फिलहाल, प्राधिकरण प्राप्त दस्तावेजों की जांच कर रहा है। दूसरी ओर, गबन की शर्मनाक घटना के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपनी आंतरिक व्यवस्था को पूरी तरह से बदल दिया है। दान राशि की गिनती की प्रक्रिया में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और कर्मचारियों की निगरानी को बेहद सघन बना दिया गया है।

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