CGPSC 2025 Result : छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग यानी CGPSC 2025 मेंस परीक्षा के रिजल्ट के बाद विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। शुरुआत में मामला 265 पदों के मुकाबले इंटरव्यू के लिए कम अभ्यर्थियों के चयन को लेकर था, लेकिन अब अभ्यर्थियों ने उत्तर पुस्तिकाओं की जांच और मार्किंग सिस्टम पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर 2023 और 2024 की कॉपियों के उदाहरण साझा करते हुए अभ्यर्थी पूछ रहे हैं कि समान उत्तर होने के बावजूद अंकों में इतना अंतर क्यों है।
265 पदों पर 608 अभ्यर्थी इंटरव्यू के लिए पात्र
CGPSC मेंस परीक्षा के बाद कुल 608 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए पात्र घोषित किया गया। अभ्यर्थियों का कहना है कि तीन गुना के नियम के हिसाब से 265 पदों के लिए करीब 795 उम्मीदवारों को बुलाया जाना चाहिए था। इस तरह 187 अभ्यर्थी कम रह गए। आयोग ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक प्रश्नपत्र में न्यूनतम अर्हकारी अंक हासिल करना जरूरी है।
न्यूनतम अंकों को लेकर आयोग का तर्क
आयोग के अनुसार, अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 33 प्रतिशत और आरक्षित वर्ग के लिए 23 प्रतिशत अंक की सीमा निर्धारित है। कई उम्मीदवार इस निर्धारित सीमा को पार नहीं कर सके। इसी वजह से तीन गुना संख्या में अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए चयनित नहीं किया जा सका। हालांकि, अब अभ्यर्थियों ने सवालों का रुख मूल्यांकन प्रक्रिया की ओर कर दिया है।
8 नंबर के सवाल पर मिले सिर्फ 2.5 अंक
एक अभ्यर्थी ने अपनी उत्तर पुस्तिका का उदाहरण साझा करते हुए दावा किया है कि उसने 8 अंकों वाले प्रश्न का उत्तर तथ्यों और जरूरी बिंदुओं के साथ व्यवस्थित तरीके से लिखा था। इसके बावजूद उसे केवल 2.5 अंक मिले। अभ्यर्थियों का सवाल है कि यदि उत्तर में अपेक्षित तथ्य मौजूद थे, तो इतने कम अंक देने का आधार क्या था।
समान उत्तरों पर अलग-अलग नंबर का दावा
मार्किंग सिस्टम को लेकर एक अन्य कॉपी का उदाहरण भी चर्चा में है। अभ्यर्थियों का दावा है कि लगभग समान उत्तर लिखने वाले दो उम्मीदवारों को अलग-अलग अंक दिए गए। एक उत्तर को 1.5 अंक मिले, जबकि दूसरे को शून्य अंक दिए जाने की बात कही जा रही है। इससे मूल्यांकन की एकरूपता पर सवाल खड़े हुए हैं।
हिंदी और अंग्रेजी उत्तरों में अंतर का आरोप
एक अन्य उत्तर पुस्तिका को लेकर दावा किया गया है कि एक ही सवाल के अंग्रेजी में लिखे उत्तर को 4.5 अंक मिले, जबकि हिंदी में लिखे उत्तर को सिर्फ 2.5 अंक दिए गए। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि यह अंतर सही साबित होता है तो मूल्यांकन में भाषा के आधार पर भेदभाव का सवाल उठ सकता है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
गलत उत्तर पर अंक देने का सवाल
होमरूल लीग से जुड़े एक प्रश्न को लेकर भी अभ्यर्थियों के बीच चर्चा है। दावा किया गया है कि उत्तर में ‘स्वराज पार्टी’ लिखा गया था, जिसे अभ्यर्थी गलत जवाब बता रहे हैं। इसके बावजूद कथित तौर पर 2.5 अंक दिए गए। अभ्यर्थियों का सवाल है कि यदि गलत उत्तर पर अंक दिए जा सकते हैं, तो सही उत्तर पर अंक काटने का पैमाना क्या है।
14 नंबर के उत्तर का मूल्यांकन नहीं होने का दावा
एक अन्य उत्तर पुस्तिका को लेकर अभ्यर्थियों ने दावा किया है कि 14 अंकों वाले प्रश्न का उत्तर लिखा गया था, लेकिन उसका मूल्यांकन नहीं हुआ। यदि यह आरोप सही साबित होता है तो यह गंभीर मामला हो सकता है, क्योंकि किसी एक प्रश्न के अंक छूटने से उम्मीदवार के कुल स्कोर और मेरिट पर सीधा असर पड़ सकता है।
आयोग ने बताई मूल्यांकन प्रक्रिया
CGPSC की ओर से कहा गया है कि उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन प्रश्नवार और कोडिंग सिस्टम के जरिए पहचान रहित तरीके से विषय विशेषज्ञों से कराया जाता है। आयोग पुनर्मूल्यांकन और पुनर्गणना का प्रावधान नहीं होने की बात भी कह चुका है। इसके बावजूद अभ्यर्थी समान उत्तरों पर अलग-अलग अंक मिलने के दावों का जवाब मांग रहे हैं।
RTI के जरिए कॉपियां हासिल करेंगे अभ्यर्थी
अब कई अभ्यर्थी सूचना के अधिकार यानी RTI के जरिए अपनी OMR शीट और मुख्य परीक्षा की प्रश्न-सह-उत्तर पुस्तिका हासिल करने की तैयारी कर रहे हैं। अंतिम परिणाम के बाद मेरिट सूची और कटऑफ भी सामने आएगी। इसके बाद मूल्यांकन को लेकर उठे सवालों की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
छोटे अंकों का बड़ा असर
प्रतियोगी परीक्षा में 0.5, 1.5 या 2 अंक का अंतर भी उम्मीदवार के भविष्य पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है। यही अंतर किसी अभ्यर्थी को इंटरव्यू तक पहुंचा सकता है और किसी दूसरे को चयन प्रक्रिया से बाहर कर सकता है। इसलिए अभ्यर्थियों की मांग है कि आयोग स्पष्ट करे कि सही उत्तर पर कम अंक क्यों दिए गए और कथित तौर पर गलत उत्तर पर अंक देने का आधार क्या था।
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