Bangladesh Hindu Attack
Bangladesh Hindu Attack: पड़ोसी देश बांग्लादेश में पिछले कई हफ्तों से जारी राजनीतिक अस्थिरता और हिंसा के बीच हिंदू समुदाय के खिलाफ अत्याचारों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में सामने आई एक वीभत्स रिपोर्ट के अनुसार, कट्टरपंथियों की उग्र भीड़ ने एक और हिंदू व्यक्ति को अपना निशाना बनाया है। यह घटना 31 दिसंबर 2025 को बांग्लादेश के शरियतपुर जिले में घटित हुई। जानकारी के मुताबिक, 50 वर्षीय खोकन दास जब अपने घर की ओर जा रहे थे, तभी भीड़ ने उन्हें घेर लिया। हमलावरों ने पहले उन पर धारदार हथियारों से ताबड़तोड़ वार किए और जब वे लहूलुहान होकर गिर पड़े, तो क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए उन्हें आग के हवाले कर दिया। इस घटना ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के लिए पिछला एक पखवाड़ा किसी दुःस्वप्न से कम नहीं रहा है। खोकन दास पर हुआ हमला पिछले कुछ दिनों में हिंदुओं पर अत्याचार की चौथी बड़ी कड़ी है। इससे पहले 24 दिसंबर को कलिमोहर यूनियन के हुसैनडांगा इलाके में 29 वर्षीय अमृत मंडल की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। वहीं, मयमनसिंह में एक कपड़ा कारखाने के भीतर एक हिंदू युवक को उसके ही सहकर्मी ने सरेआम गोली मार दी थी। सबसे भयानक मंजर 18 दिसंबर को देखने को मिला था, जब दीपू चंद्र दास नामक युवक की बेरहमी से हत्या करने के बाद उसकी लाश को बीच सड़क पर एक पेड़ से लटकाकर आग लगा दी गई थी। ये घटनाएं दर्शाती हैं कि वहां कट्टरपंथी तत्व किस कदर हावी हो चुके हैं।
लगातार हो रहे सुनियोजित हमलों के कारण बांग्लादेश के विभिन्न जिलों में रहने वाले हिंदू परिवार भारी दहशत में हैं। रिपोर्टों के अनुसार, कई इलाकों में हिंदू बस्तियों को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे लोग अपने घरों में कैद होने को मजबूर हैं। स्थानीय प्रशासन की निष्क्रियता ने इन कट्टरपंथी समूहों के हौसले और बुलंद कर दिए हैं। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यदि हिंसा पर तुरंत लगाम नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में बड़े पैमाने पर विस्थापन और पलायन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। धार्मिक स्थलों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को भी नुकसान पहुँचाया जा रहा है, जिससे समुदाय की आर्थिक कमर टूट रही है।
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे इन अत्याचारों की गूंज भारत के कोने-कोने में सुनाई दे रही है। दिल्ली, कोलकाता और गुवाहाटी जैसे प्रमुख शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाए और बांग्लादेश सरकार पर दबाव बनाए। भारत के कई राजनीतिक दिग्गजों ने भी इन घटनाओं की पुरजोर निंदा की है। सांसदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि भारत सरकार को कूटनीतिक स्तर पर सख्त कदम उठाने चाहिए ताकि पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों की जान-माल की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।
बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ रही इस नफरत और हिंसा पर वैश्विक मानवाधिकार संस्थाओं की चुप्पी ने भी चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण एशिया में शांति बनाए रखने के लिए बांग्लादेश में कानून का शासन बहाल होना आवश्यक है। सोशल मीडिया पर भी ‘सेव बांग्लादेशी हिंदू’ जैसे अभियान जोर पकड़ रहे हैं, जहाँ लोग पीड़ित परिवारों के वीडियो और तस्वीरें साझा कर न्याय की गुहार लगा रहे हैं। अब देखना यह है कि क्या बांग्लादेश की अंतरिम सरकार इन कट्टरपंथियों के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई करती है या अल्पसंख्यकों को उनके हाल पर छोड़ दिया जाएगा।
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