Ram Mandir Trust : श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सोमवार, 6 जुलाई को एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफों को स्वीकार कर लिया है। कथित चंदा हेराफेरी के मामले और ट्रस्ट की छवि को पहुंचे नुकसान के मद्देनजर यह बड़ा फेरबदल किया गया है। ट्रस्ट की हालिया बैठक में सर्वसम्मति से यह तय किया गया कि अब इन महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन कृष्ण मोहन करेंगे। उन्हें तत्काल प्रभाव से ट्रस्ट का अंतरिम महासचिव नियुक्त किया गया है। कृष्ण मोहन का नाम तब और चर्चा में आया जब उन्होंने पिछले साल वरिष्ठ ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद रिक्त हुए स्थान पर अपनी सेवाएं देना शुरू किया था।

कौन हैं कृष्ण मोहन? एक संक्षिप्त परिचय
कृष्ण मोहन उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के निवासी हैं। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि अत्यंत प्रभावशाली रही है। 1970 के दशक में उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से एमएससी की उपाधि प्राप्त की। अपनी मेधा के दम पर उनका चयन भारतीय वन सेवा (IFS) में हुआ, जहाँ उन्होंने महाराष्ट्र कैडर के अधिकारी के रूप में लंबे समय तक अपनी सेवाएं दीं। सेवानिवृत्ति के पश्चात, वे पूरी तरह से सामाजिक और जनसेवा के कार्यों में समर्पित हो गए। उन्हें ट्रस्ट में शामिल करने का निर्णय एक सोची-समझी परंपरा के तहत लिया गया था, ताकि समाज के उस विशेष वर्ग को प्रतिनिधित्व मिल सके जिसे कामेश्वर चौपाल के समय से ट्रस्ट में प्राथमिकता दी गई थी।

निष्पक्ष जांच और न्याय सुनिश्चित करना प्राथमिकता
अंतरिम महासचिव के रूप में अपनी नियुक्ति के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए कृष्ण मोहन ने अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि जब तक ट्रस्ट में स्थायी महामंत्री की नियुक्ति नहीं हो जाती, तब तक वे इस दायित्व को पूरी ईमानदारी के साथ निभाएंगे। उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता पूरे ‘चंदा गबन’ प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करना है। उन्होंने कठोर लहजे में कहा कि इस घटना ने न केवल ट्रस्ट के सदस्यों बल्कि देश-विदेश के करोड़ों राम भक्तों की आस्था को गहरी चोट पहुंचाई है। कृष्ण मोहन ने आश्वासन दिया कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसे कानून के अनुसार कठोर से कठोर दंड दिलाने में ट्रस्ट कोई कसर नहीं छोड़ेगा।
ट्रस्ट की साख बहाली की चुनौती
कृष्ण मोहन के सामने इस समय ट्रस्ट की खोई हुई साख को बहाल करना एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने दोहराया कि दोषियों के विरुद्ध न्यायोचित कार्रवाई करना उनका एकमात्र लक्ष्य है और इसके लिए ट्रस्ट पूरी गंभीरता के साथ प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर काम करेगा। उनके इस बयान से स्पष्ट है कि ट्रस्ट अब किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। एक कुशल प्रशासक और पूर्व आईएफएस अधिकारी होने के नाते, उनसे यह उम्मीद की जा रही है कि वे अपनी प्रशासनिक क्षमता का उपयोग करते हुए इस संवेदनशील मामले को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाएंगे और राम भक्तों का विश्वास फिर से कायम करेंगे।
Read more : Jaswant Singh Khalra : जसवंत सिंह खालड़ा की अनकही दास्तान, फिल्म सतलुज और न्याय की लंबी लड़ाई की कहानी











