Ram Mandir Donation Row: अयोध्या राम मंदिर के दानपात्रों से हुई कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोपों के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ट्रस्ट ने 6 जुलाई को दोपहर 3 बजे मणिराम दास छावनी में एक औपचारिक बैठक बुलाई है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि द्वारा जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, इस बैठक का एजेंडा बेहद संवेदनशील है। इसमें सबसे प्रमुख विषय ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफों पर विचार करना है। यह पहली बार है जब ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों के इस्तीफे का मुद्दा आधिकारिक तौर पर एजेंडे में शामिल किया गया है, जो मंदिर प्रबंधन के भीतर चल रही हलचल को स्पष्ट करता है।

एसआईटी की रिपोर्ट और वित्तीय जवाबदेही पर मंथन
बैठक का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा दानपात्रों से प्राप्त राशि में हुई हेराफेरी की जांच है। विशेष जांच दल (SIT) द्वारा तैयार की गई अंतरिम रिपोर्ट इस बैठक में ट्रस्ट के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। महंत नृत्यगोपाल दास की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली इस बैठक में मंदिर की वित्तीय व्यवस्था, भविष्य की कार्यप्रणाली और वित्त वर्ष 2025-26 के आय-व्यय के लेखा-जोखा पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। ट्रस्ट ने इसे ‘अत्यावश्यक विषयों’ पर विचार करने के लिए बुलाई गई बैठक बताया है। देश भर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह बैठक ट्रस्ट के नेतृत्व में बड़े बदलाव का संकेत देगी और भविष्य में मंदिर की प्रशासनिक जवाबदेही को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

चंदा चोरी मामले में अब तक की कार्रवाई और गिरफ्तारियां
उल्लेखनीय है कि दान चोरी का यह मामला तब सुर्खियों में आया जब मंदिर के दानपात्रों में जमा नकदी और विदेशी मुद्रा की गिनती के दौरान बड़े स्तर पर हेराफेरी का खुलासा हुआ। अब तक इस प्रकरण में पुलिस और एसआईटी ने कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया है और जांच एजेंसियों ने लगभग 80 लाख रुपये की नकद राशि बरामद की है। गिरफ्तार आरोपियों में लवकुश मिश्र, अनुकल्प मिश्र, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रामशंकर यादव, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव और करुणेश पांडेय प्रमुख हैं। इनमें से अधिकांश आरोपी ‘सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज’ नामक निजी सुरक्षा एजेंसी से जुड़े हैं, जिन्हें मंदिर में नकदी गिनने का कार्य सौंपा गया था। इस गिरफ्तारी ने सुरक्षा और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका और आरोपों का दायरा
इस पूरे विवाद में पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। उन पर रिश्तेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने, नौकरी दिलाने में हेरफेर करने, कमीशन लेने और ट्रस्ट की संपत्तियों के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। हालांकि, इन आरोपों पर अभी जांच जारी है और कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकला है, लेकिन ट्रस्ट की छवि को बचाने के लिए इन आरोपों का निराकरण करना प्रबंधन की प्राथमिकता है। 6 जुलाई की यह बैठक न केवल वर्तमान संकट के समाधान के लिए है, बल्कि यह मंदिर की कार्यप्रणाली और भविष्य की दिशा निर्धारित करने वाला एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है।
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