सेहत-फिटनेस

Fatty Liver Diet: फैटी लिवर और डायबिटीज के मरीजों के लिए जहर है ‘जूस’! आज ही बदलें आदत, जानें क्यों बेहतर हैं साबुत फल

Fatty Liver Diet: अक्सर हम ताजगी और अच्छी सेहत के लिए फलों के जूस को एक बेहतरीन विकल्प मानते हैं। सुबह के नाश्ते में एक गिलास जूस पीना एक हेल्दी लाइफस्टाइल का हिस्सा माना जाता है, लेकिन चिकित्सा विज्ञान की दृष्टि में यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि जूस निकालते समय फलों का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यानी फाइबर बाहर निकल जाता है। फाइबर के बिना बचा हुआ जूस केवल गाढ़ा शुगर का घोल रह जाता है, जो शरीर में प्रवेश करते ही ब्लड शुगर के स्तर को असामान्य रूप से बढ़ा सकता है। लगातार जूस का सेवन करने से शरीर में आवश्यक एंटीऑक्सीडेंट्स और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी भी हो सकती है।

डॉक्टर की सलाह: क्या है जूस पीने का सही तरीका?

शारदा हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर भुमेश त्यागी के अनुसार, फलों का जूस कभी-कभार ही पीना चाहिए। वह भी बहुत कम मात्रा में और बिना किसी अतिरिक्त चीनी के। डॉ. त्यागी स्पष्ट करते हैं कि जो लोग किसी गंभीर शारीरिक कमजोरी के कारण फल चबाने में असमर्थ हैं, वे सीमित मात्रा में जूस ले सकते हैं। हालांकि, मधुमेह (Diabetes), मोटापा और लिवर से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए जूस का सेवन फायदे से ज्यादा नुकसानदेह साबित हो सकता है। उनके अनुसार, किसी भी स्थिति में जूस को साबुत फल का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

फैटी लिवर के मरीजों के लिए जूस के खतरे

डॉक्टरों का मानना है कि ताजे फलों की तुलना में जूस में फ्रक्टोज (एक प्रकार की प्राकृतिक चीनी) की सांद्रता बहुत अधिक होती है। जब हम जूस पीते हैं, तो यह फ्रक्टोज शरीर में बहुत तेजी से अवशोषित होता है। अधिक मात्रा में जूस पीने से यह अतिरिक्त फ्रक्टोज सीधे लिवर तक पहुँचता है और वहां वसा (Fat) के रूप में जमा होने लगता है। यह प्रक्रिया ‘फैटी लिवर’ की समस्या को और गंभीर बना सकती है। इसके विपरीत, जब हम साबुत फल खाते हैं, तो उसमें मौजूद फाइबर शुगर के अवशोषण की गति को धीमा कर देता है, जिससे लिवर पर अचानक दबाव नहीं पड़ता और मेटाबॉलिज्म संतुलित रहता है।

फाइबर का महत्व और इंसुलिन रिस्पॉन्स

साबुत फल खाने का सबसे बड़ा लाभ इसमें मौजूद डाइटरी फाइबर है। जूस पीने से शरीर में इंसुलिन का स्तर तेजी से बढ़ता है, जो समय के साथ इंसुलिन रेजिस्टेंस का कारण बन सकता है। फल खाने से न केवल इंसुलिन नियंत्रित रहता है, बल्कि यह पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है। फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है और शरीर को तृप्ति का एहसास देता है, जिससे व्यक्ति बेवजह की कैलोरी लेने से बच जाता है। वजन घटाने और मेटाबॉलिक हेल्थ में सुधार के लिए फल चबाकर खाना ही एकमात्र सही तरीका है।

लिवर के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प: साबुत फल

लिवर की सेहत बनाए रखने के लिए साबुत फल ही सबसे ‘सुपरफूड’ माने जाते हैं। इनमें विटामिन, मिनरल्स और शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स का प्राकृतिक संतुलन होता है। फलों के छिलके और गूदे में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स लिवर की कोशिकाओं को डैमेज होने से बचाते हैं। फल खाने से मिलने वाली प्राकृतिक कैलोरी शरीर में ऊर्जा का संचार करती है, जबकि जूस से मिलने वाली ‘लिक्विड कैलोरी’ मोटापे को बढ़ावा देती है। अतः, यदि आप अपने लिवर को स्वस्थ रखना चाहते हैं और डायबिटीज जैसे रोगों से बचना चाहते हैं, तो जूस का गिलास छोड़ें और अपनी डाइट में ताजे साबुत फलों को शामिल करें।

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