US-Iran War 2026
US-Iran War 2026 : पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदें एक बार फिर धूमिल होती नजर आ रही हैं। ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर (युद्धविराम) टूटने का जोखिम अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। दोनों देशों के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता की कोई निश्चित तारीख तय नहीं हो पाने के कारण तनाव चरम पर है। तेहरान का आरोप है कि अमेरिका ने उसके बंदरगाहों की घेराबंदी कर रखी है और उसकी लगभग 11 ट्रिलियन डॉलर की संपत्तियों को अवैध रूप से फ्रीज कर दिया है। इसी गतिरोध के बीच ईरान ने अब अमेरिका को खुली चुनौती देते हुए बड़े युद्ध के संकेत दे दिए हैं।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिका को चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कर दिया है कि यदि अगले 48 घंटों के भीतर अमेरिका ईरानी संपत्तियों को रिलीज करने का कोई ठोस प्रस्ताव पेश नहीं करता, तो ईरान वर्तमान सीजफायर को खत्म कर देगा। अराघची ने यह भी घोषणा की कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) तब तक बंद रहेगा, जब तक ईरान की $11 ट्रिलियन की राशि वापस नहीं मिल जाती। ईरान डेली न्यूज द्वारा साझा किए गए वीडियो में अराघची का यह आक्रामक अंदाज वैश्विक तेल बाजार के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया है।
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे विवाद पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर फिलहाल अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण है। ट्रंप ने खुलासा किया कि जब ईरान ने मार्ग खोलने पर सहमति जताई, तो उनके प्रशासन के अधिकारी खुश थे, लेकिन वे स्वयं इसके खिलाफ थे। ट्रंप का तर्क है कि यदि होर्मुज खुलता है, तो ईरान तेल निर्यात के जरिए प्रतिदिन 500 मिलियन डॉलर की कमाई करेगा। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि जब तक कोई ठोस और सकारात्मक ‘डील’ नहीं होती, तब तक वे ईरान को आर्थिक मजबूती हासिल करने का मौका नहीं देंगे।
युद्ध की अवधि पर पूछे गए सवाल पर ट्रंप ने अपने अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने शुरुआती चार हफ्तों में ही ईरान को सैन्य रूप से पंगु बना दिया है। उनके अनुसार, अमेरिका ने ईरान के 78% निर्धारित लक्ष्यों को पहले ही नष्ट कर दिया है। ट्रंप ने धमकी दी कि यदि ईरान समझौते की मेज पर नहीं आता है, तो वे बचे हुए 25% ठिकानों को भी पूरी तरह मटियामेट कर देंगे। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी नौसेना और वायुसेना पूरी तरह ‘लॉक और लोडेड’ है और किसी भी आदेश पर कार्रवाई के लिए तैयार है।
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की तकनीकी लाचारी पर निशाना साधते हुए कहा कि समय का दबाव अमेरिका पर नहीं, बल्कि ईरान पर है। उन्होंने बताया कि यदि ईरान का तेल निर्यात लंबे समय तक बाधित रहा, तो उनके पास तेल स्टोर करने की जगह खत्म हो जाएगी, जिससे उनका पूरा ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर ‘विस्फोट’ की स्थिति में पहुंच सकता है। ट्रंप के अनुसार, जमीन के नीचे का दबाव ईरान के तेल कुओं को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे वे कभी उबर नहीं पाएंगे। अब पूरी दुनिया की नजरें अगले 48 घंटों पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति सफल होगी या एक नया भीषण युद्ध शुरू होगा।
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