LIC Share Crash: भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के शेयरों में मंगलवार को कारोबार की शुरुआत के साथ ही भारी गिरावट देखने को मिली। बाजार खुलते ही LIC का स्टॉक करीब 8 प्रतिशत तक टूट गया। यह गिरावट केंद्र सरकार द्वारा कंपनी में हिस्सेदारी बेचने के लिए लाए गए ‘ऑफर फॉर सेल’ (OFS) के कारण दर्ज की गई।सोमवार को LIC के शेयर बाजार में ₹428.50 के स्तर पर बंद हुए थे। वहीं, मंगलवार को शेयर गिरावट के साथ करीब ₹392 प्रति शेयर के भाव पर खुले। शुरुआती कारोबार में स्टॉक ने ₹390.50 का इंट्राडे लो भी छुआ। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, OFS का फ्लोर प्राइस मौजूदा बाजार भाव से कम होने के कारण निवेशकों में बिकवाली का दबाव बढ़ा।

OFS के कारण बढ़ा शेयरों पर दबाव
LIC के शेयरों में गिरावट का मुख्य कारण सरकार का हिस्सेदारी बिक्री का फैसला माना जा रहा है। सरकार ने LIC में अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचने के लिए ऑफर फॉर सेल (OFS) की घोषणा की है। OFS के तहत शेयरों की कीमत मौजूदा बाजार मूल्य से कम रखी गई है, जिससे बाजार में शेयर की कीमत पर दबाव देखने को मिला।मौजूदा बाजार भाव के आधार पर LIC का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 5.05 लाख करोड़ रुपये के आसपास है। निवेशकों का ध्यान अब इस बात पर है कि OFS को बाजार से कैसी प्रतिक्रिया मिलती है और सरकार कितनी हिस्सेदारी बेचने में सफल रहती है।

सरकार ने LIC में 2.5% हिस्सेदारी बेचने का रखा प्रस्ताव
केंद्र सरकार ने 4 अगस्त को LIC में 2.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के लिए ऑफर फॉर सेल की घोषणा की थी। इसके साथ ही सरकार ने ‘ग्रीन शू ऑप्शन’ के जरिए अतिरिक्त 4 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने का विकल्प भी रखा है।OFS के तहत मंगलवार को नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए बोली प्रक्रिया शुरू हुई, जबकि रिटेल निवेशक बुधवार को इसमें हिस्सा ले सकेंगे। सरकार ने इस बिक्री के लिए न्यूनतम कीमत यानी फ्लोर प्राइस ₹382 प्रति शेयर तय किया है।
DIPAM ने दी OFS की पूरी जानकारी
डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) के सचिव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए LIC OFS से जुड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए OFS पहले खुलेगा और रिटेल निवेशकों को अगले दिन बोली लगाने का मौका मिलेगा।उन्होंने कहा कि सरकार LIC में 2.5 प्रतिशत इक्विटी बेचने की पेशकश कर रही है। इसके अलावा ग्रीन शू ऑप्शन के तहत अतिरिक्त 4 प्रतिशत हिस्सेदारी बिक्री का विकल्प भी मौजूद रहेगा। इस प्रक्रिया से सरकार को न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (MPS) के लक्ष्य को समय से पहले हासिल करने में मदद मिलेगी।
ग्रीन शू ऑप्शन से बढ़ सकती है हिस्सेदारी बिक्री
यदि ग्रीन शू ऑप्शन पूरी तरह से सब्सक्राइब हो जाता है तो सरकार LIC में कुल 6.5 प्रतिशत तक हिस्सेदारी बेच सकती है। इसके तहत सरकार 82.22 करोड़ से अधिक शेयरों की बिक्री कर सकती है।इस हिस्सेदारी बिक्री से सरकार को लगभग 31,000 करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद है। यह राशि सरकार के विनिवेश कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

LIC में सरकार की अभी भी 96.5% हिस्सेदारी
फिलहाल केंद्र सरकार के पास LIC की करीब 96.5 प्रतिशत हिस्सेदारी मौजूद है। सरकारी बीमा कंपनी LIC ने मई 2022 में भारतीय शेयर बाजार में कदम रखा था। कंपनी का आईपीओ भारत का अब तक का सबसे बड़ा इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) था।सरकार की यह हिस्सेदारी बिक्री LIC में सार्वजनिक भागीदारी बढ़ाने और बाजार नियामक SEBI के नियमों को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
MPS नियमों को पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम
SEBI के नियमों के अनुसार, सूचीबद्ध कंपनियों को कम से कम 25 प्रतिशत सार्वजनिक शेयरधारिता बनाए रखना जरूरी होता है। LIC में हिस्सेदारी बिक्री के जरिए सरकार इस लक्ष्य के करीब पहुंचने की कोशिश कर रही है।हालांकि, ग्रीन शू ऑप्शन के पूरी तरह इस्तेमाल के बाद भी LIC में सरकार की हिस्सेदारी काफी अधिक बनी रहेगी। बाजार की नजर अब OFS की सफलता और LIC के शेयर प्रदर्शन पर टिकी हुई है।
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