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Pakistan coup news : पाकिस्तान में तख्तापलट की सुगबुगाहट, सेना प्रमुख आसिम मुनीर की राष्ट्रपति बनने की तैयारी, खतरे में जरदारी की कुर्सी

Pakistan coup news: पाकिस्तान एक बार फिर सियासी संकट की दहलीज पर खड़ा है। सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के बीच मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं। 5 जुलाई 1977 को हुए पहले सैन्य तख्तापलट के बाद, ऐसा लग रहा है कि जुलाई का महीना एक बार फिर पाकिस्तान के लिए राजनीतिक संकट का संकेत दे रहा है।

मुनीर का अमेरिकी दौरा, ट्रंप से करीबी ने बढ़ाई अटकलें

सेना प्रमुख मुनीर का हालिया अमेरिका दौरा और वहां डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात ने राजनीतिक हलचल को और बढ़ा दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका की ओर से शहबाज शरीफ के बजाय मुनीर को ज्यादा तवज्जो मिल रही है, जिससे इस तख्तापलट में विदेशी हाथ की आशंका भी गहराई है।

बिलावल भुट्टो के बयान से मचा सियासी भूचाल

पूर्व विदेश मंत्री और जरदारी के बेटे बिलावल भुट्टो ने हाल ही में बयान दिया कि वे भारत को हाफिज सईद और मसूद अजहर सौंप सकते हैं, यदि भारत समर्थन करे। इसके साथ ही उन्होंने सेना प्रमुख मुनीर की तीखी आलोचना की। उनके इस बयान ने पाकिस्तानी राजनीति में नई उथल-पुथल पैदा कर दी है।

जरदारी पद छोड़ें या तख्तापलट झेलें

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुनीर राष्ट्रपति पद की ओर बढ़ना चाहते हैं। यदि जरदारी स्वेच्छा से पद नहीं छोड़ते, तो सेना सीधा तख्तापलट कर सकती है। सूत्रों का कहना है कि यह सब सामान्य दिखाने के लिए रणनीति के तहत किया जा रहा है, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध कम हो।

इमरान खान अब भी खतरा

मुनीर की राह में सबसे बड़ा रोड़ा पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान हैं, जो फिलहाल जेल में बंद हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि शरीफ परिवार भी मजबूरी में मुनीर का समर्थन कर रहा है क्योंकि जरा सी बगावत उन्हें भी इमरान खान की तरह जेल पहुंचा सकती है।

मुनीर की महत्वाकांक्षा और अमेरिका की रणनीति का मेल

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुनीर की असली महत्वाकांक्षा राष्ट्रपति बनना है और इसके लिए वे अमेरिका से बैकिंग ले रहे हैं। वहीं, ट्रंप की नजर पाकिस्तान को बिटकॉइन और व्यापार के लिए मुफीद ज़मीन बनाने पर है। ऐसे में मुनीर अमेरिका के लिए एक ‘मोहरा’ बनते दिख रहे हैं।

चीन से नजदीकी बना जरदारी के पतन की वजह

एक और बड़ा कारण जरदारी की चीन के साथ नजदीकी है। अमेरिका नहीं चाहता कि चीन समर्थक नेता सत्ता में बना रहे। यही वजह है कि जरदारी की कुर्सी खतरे में मानी जा रही है और उनकी जगह प्रो-अमेरिकन मुनीर को लाना अमेरिका की मंशा मानी जा रही है।

पाकिस्तान का राजनीतिक परिदृश्य एक बार फिर तख्तापलट की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। 1958, 1977 और 1999 के बाद यह चौथी बार हो सकता है जब सेना सत्ता पर काबिज हो। क्या आसिफ अली जरदारी पद छोड़ेंगे या इतिहास खुद को दोहराएगा? यह आने वाला वक्त तय करेगा।

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