Millionaire Migration : ‘हेनली प्राइवेट वेल्थ माइग्रेशन रिपोर्ट 2026’ के अनुसार, इस वर्ष दुनिया भर में करोड़पतियों के पलायन का एक नया और चिंताजनक रिकॉर्ड बनने जा रहा है। अनुमान है कि करीब 1.65 लाख अमीर अपना देश छोड़कर अन्य देशों में बसने वाले हैं। यह आंकड़ा पिछले साल के 1.42 लाख से काफी अधिक है, जबकि 2024 में यह संख्या 1.34 लाख और 2013 में मात्र 51 हजार थी। यह रुझान स्पष्ट करता है कि अब धनी परिवार केवल टैक्स में छूट पाने के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता, व्यक्तिगत सुरक्षा और निवेश के बेहतर अवसरों की तलाश में अपनी जड़ें बदल रहे हैं। इन आंकड़ों में यूएई 85.3 के वेल्थ मोबिलिटी स्कोर के साथ दुनिया का सबसे पसंदीदा ‘वेल्थ हब’ बनकर उभरा है, जबकि भारत का स्कोर 56.5 है।

अमेरिका और ब्रिटेन: अमीर परिवारों के पलायन का नया केंद्र
आश्चर्यजनक रूप से विकसित देश जैसे अमेरिका और ब्रिटेन भी अब बड़े पैमाने पर करोड़पतियों के पलायन का सामना कर रहे हैं। अमेरिका का वेल्थ मोबिलिटी स्कोर गिरकर 62.3 हो गया है, जहाँ से अन्य देशों की नागरिकता चाहने वाले आवेदनों में भारी वृद्धि हुई है। 2025 में ऐसे आवेदनों का आंकड़ा दोगुना हो गया और यह तेजी 2026 में भी जारी है। वहीं, ब्रिटेन की स्थिति और भी गंभीर है; 2018 में जो देश पलायन के मामले में 20वें स्थान पर था, वह अब दुनिया के टॉप 5 सोर्स मार्केट में शामिल हो गया है। ब्रिटेन से होने वाले आवेदनों में ब्रिटिश नागरिकों की हिस्सेदारी 2018 के 8% से बढ़कर अब लगभग 50% तक पहुंच गई है, जो वहां के अमीरों में बढ़ती असुरक्षा को दर्शाता है।

भारत: एस्टेट प्लानिंग और टैक्स स्ट्रक्चरिंग के लिए दूसरी नागरिकता
भारत के लिए वेल्थ मोबिलिटी स्कोर 56.5 है, जो देश को ‘ढांचागत चुनौतियों’ वाली श्रेणी में रखता है। इसका मुख्य कारण कुछ चुनिंदा हाथों में पूंजी का संकेंद्रण और टैक्स नियमों की जटिलता है। आज भारतीय अमीर परिवारों के लिए दूसरी नागरिकता या निवास का विकल्प केवल शौक नहीं, बल्कि एक अनिवार्य ‘एस्टेट प्लानिंग’ और ‘टैक्स स्ट्रक्चरिंग’ का हिस्सा बन गया है। भारतीय उद्यमी अब शिक्षा, व्यापार के वैश्विक विस्तार और उत्तराधिकार नियोजन (Succession Planning) को सुगम बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय नागरिकता की ओर देख रहे हैं।
यूएई का उदय और यूरोप की बदलती प्राथमिकताएं
यूएई (UAE) का 85.3 का स्कोर उसे विश्व का सबसे आकर्षक प्लेटफॉर्म बनाता है। यहां आने वाले अधिकांश प्रवासी कारोबारी इसे एक स्थायी ठिकाने के बजाय एक ‘प्लेटफॉर्म’ के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं, जहां से वे विश्व के अन्य हिस्सों में अपने व्यापार को और बेहतर तरीके से संचालित कर सकें। दूसरी ओर, यूरोप में निवेश-आधारित नागरिकता की मांग का आधा हिस्सा पुर्तगाल, इटली, नीदरलैंड्स और साइप्रस जैसे देशों की ओर है। हाल ही में स्पेन द्वारा गोल्डन वीसा बंद करने और पुर्तगाल के रियल एस्टेट मार्ग में बदलाव के कारण, अब निवेश की मांग का बड़ा हिस्सा सीधे ग्रीस की ओर मुड़ गया है।
निष्कर्ष: क्या संकेत दे रहा है अमीरों का यह पलायन?
करोड़पतियों का यह बढ़ता वैश्विक पलायन अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में आ रहे बड़े बदलावों का संकेत है। जहां एक ओर देश अपनी कर नीतियों को सख्त कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर धनी वर्ग अधिक लचीलेपन और सुरक्षा की तलाश में है। यह प्रवास न केवल उन देशों की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है जिन्हें वे छोड़ रहे हैं, बल्कि उन देशों के लिए भी नए अवसर पैदा कर रहा है जो उन्हें अपने यहां व्यापार और निवेश के लिए बेहतर माहौल प्रदान कर रहे हैं। यह एक वैश्विक ‘वेल्थ शिफ्ट’ का समय है, जहां सुरक्षा और अवसर ही भविष्य की मुख्य करेंसी बन गए हैं।











