Ahmedabad plane crash: सुप्रीम कोर्ट ने अहमदाबाद में हुए दर्दनाक प्लेन क्रैश को लेकर मीडिया और जांच रिपोर्ट्स में पायलट की गलती को प्रमुख कारण बताने वाली चर्चाओं पर गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने सोमवार को इस मामले में केंद्र सरकार, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) से जवाब मांगा है।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा कि बिना पूरी जांच के पायलट पर सीधे तौर पर दोष डालना न केवल अनुचित है, बल्कि अफसोसजनक भी है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी दुर्घटनाओं में तकनीकी पहलुओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

NGO की याचिका में गंभीर आरोप
सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन नामक एविएशन सुरक्षा से जुड़ी एक NGO ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट में महत्वपूर्ण जानकारी या तो छुपाई गई है या नजरअंदाज की गई है। इसमें विशेष रूप से ईंधन स्विच की खराबी और इलेक्ट्रिकल फॉल्ट जैसे तकनीकी मुद्दों का जिक्र किया गया है।याचिका के अनुसार, रिपोर्ट केवल पायलट को दोषी ठहराती है, जबकि असली कारणों की जांच नहीं की गई। इससे नागरिकों के जीवन, समानता और सही जानकारी के अधिकार का उल्लंघन हुआ है।

कोर्ट में प्रशांत भूषण की दलील
NGO की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने पैरवी करते हुए कहा कि दुर्घटना को 100 दिन से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन अब तक केवल प्रारंभिक रिपोर्ट ही सामने आई है। उन्होंने कहा “रिपोर्ट यह स्पष्ट नहीं करती कि वास्तव में क्या हुआ और आगे ऐसी घटनाओं से बचने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए।”यह हादसा 12 जून को तब हुआ था जब एअर इंडिया का बोइंग 787-8 विमान, जो अहमदाबाद से लंदन जा रहा था, टेकऑफ के कुछ ही देर बाद एक मेडिकल हॉस्टल की इमारत से टकरा गया। इस भीषण दुर्घटना में 270 लोगों की मौत हो गई। विमान में मुख्य पायलट सुमीत सभरवाल और को-पायलट क्लाइव कुंदर थे।
कॉकपिट ऑडियो बना विवाद का कारण
AAIB द्वारा 12 जुलाई को जारी प्रारंभिक रिपोर्ट में कॉकपिट ऑडियो के हवाले से बताया गया कि टेकऑफ के दौरान एक पायलट ने कहा “तुमने कट क्यों किया?”
जवाब मिला, “मैंने नहीं किया।” इस संवाद को लेकर पायलट की गलती की अटकलें लगाई गईं, लेकिन कोर्ट ने कहा कि यह आंशिक जानकारी है और इससे निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
निष्पक्ष जांच पर जोर
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग बिल्कुल उचित है, लेकिन रिपोर्ट के सभी निष्कर्ष सार्वजनिक करने से जांच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। बेंच ने संकेत दिए कि स्वतंत्र जांच एजेंसी के गठन की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है।
अहमदाबाद प्लेन क्रैश को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती यह दर्शाती है कि हादसे में सही तथ्यों और जवाबदेही की आवश्यकता है। साथ ही, बिना जांच पूरी हुए पायलट को दोष देना न केवल अन्यायपूर्ण है बल्कि एविएशन सेफ्टी के लिए भी खतरनाक हो सकता है।











