UP Assembly Row: उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान राम मंदिर दान से जुड़े कथित विवाद को लेकर हुए विपक्षी हंगामे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी और उसके नेतृत्व पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने पहले सर्वदलीय बैठक और कार्य मंत्रणा समिति में आश्वासन दिया था कि जिन विषयों पर चर्चा करानी होगी, वे विधानसभा के नियमों के तहत विधिवत नोटिस देंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि नियमों के अनुरूप स्वीकार किए गए प्रत्येक विषय पर तथ्यात्मक और तर्कपूर्ण जवाब दिया जाएगा, लेकिन इसके बावजूद विपक्ष ने सदन की कार्यवाही बाधित करने का रास्ता चुना।

‘नियमों की जगह हंगामा करना लोकतांत्रिक नहीं’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यदि किसी मुद्दे पर चर्चा करनी है तो उसके लिए विधानसभा की तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नियमों के तहत बहस और चर्चा का स्वागत है, लेकिन नारेबाजी, वेल में आकर विरोध करना और प्लेकार्ड दिखाकर सदन की कार्यवाही बाधित करना उचित नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, विपक्ष ने चर्चा के बजाय हंगामे का रास्ता अपनाकर सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाने का प्रयास किया।

सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले का भी किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि से संबंधित मामला अभी भी सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में चल रही प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी ने इस विषय को सदन में जिस तरीके से उठाया, उससे न्यायिक प्रक्रिया का भी अनादर हुआ है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार किसी भी विषय पर चर्चा से पीछे नहीं हटती, लेकिन इसके लिए संवैधानिक और संसदीय नियमों का पालन आवश्यक है। उन्होंने विपक्ष के व्यवहार को “शर्मनाक” बताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान सभी दलों की जिम्मेदारी है।
‘संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान में सपा का विश्वास नहीं’
सीएम योगी ने समाजवादी पार्टी पर संवैधानिक संस्थाओं के प्रति सम्मान नहीं रखने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय परंपराओं में विश्वास रखने वाली राजनीतिक पार्टियां नियमों के भीतर रहकर अपनी बात रखती हैं, जबकि समाजवादी पार्टी का इतिहास हंगामे और टकराव की राजनीति से जुड़ा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिनका मुख्य उद्देश्य केवल “हल्लाबोल” की राजनीति करना रहा हो, उनसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के पालन की अपेक्षा करना कठिन है।
राम मंदिर मामले पर सरकार का पक्ष रखा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर दान से जुड़े कथित मामले पर भी सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि अब तक की जांच में किसी साधु-संत की संलिप्तता सामने नहीं आई है। उनके अनुसार, 1100 से अधिक लोगों की जांच की गई, जिनमें केवल आठ लोगों की कथित भूमिका सामने आने की बात कही गई है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों को पकड़ा गया है, उनका भारतीय जनता पार्टी या किसी साधु-संत से कोई संबंध नहीं पाया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ व्यक्तियों के कथित कृत्यों के आधार पर पूरे राम मंदिर या धार्मिक संस्थाओं को बदनाम करना उचित नहीं है।

सपा और कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री योगी ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस दोनों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि जो दल पहले भी राम जन्मभूमि और भगवान श्रीराम से जुड़े मुद्दों पर विरोधी रुख अपनाते रहे हैं, वही आज राम मंदिर के नाम पर राजनीति कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिना तथ्यों के पूरे मंदिर और सनातन परंपरा पर सवाल उठाना करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसा है। उन्होंने विपक्ष के रवैये को सनातन धर्म के प्रति अपमानजनक बताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में आरोपों के बजाय तथ्यों और नियमों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए। सरकार ने दोहराया कि यदि किसी भी मुद्दे पर वैधानिक प्रक्रिया के तहत चर्चा की मांग की जाएगी तो उसका जवाब सदन में पूरी जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ दिया जाएगा।
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