Ram Mandir Trust: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का बड़ा फैसला , चंदा विवाद के बीच चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे मंजूर

Ram Mandir Trust: अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और कड़ा निर्णय लेते हुए अपने महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट की यह बैठक हालिया विवादों और एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट को ध्यान में रखकर बुलाई गई थी। इस रिपोर्ट के तथ्यों के आधार पर ट्रस्ट ने न केवल उनके इस्तीफों को मंजूरी दी है, बल्कि उन्हें अयोध्या से भी दूर भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ट्रस्ट के अन्य सदस्यों ने स्पष्ट किया कि हाल की घटनाओं से न केवल संस्था की छवि प्रभावित हुई है, बल्कि इससे करोड़ों राम भक्तों की आस्था को भी गहरी ठेस पहुंची है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

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चंदा हेराफेरी के आरोपों के बाद ट्रस्ट का सख्त रुख

ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास की अध्यक्षता में आयोजित यह बैठक काफी हंगामेदार रही। चंदा चोरी और चढ़ावे में कथित हेराफेरी की घटना सामने आने के बाद यह ट्रस्ट की पहली औपचारिक बैठक थी। बैठक के दौरान कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे का प्रस्ताव रखा, जिस पर सर्वसम्मति से सहमति बनी। इस दौरान ट्रस्ट अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि वे इस घटनाक्रम से अत्यंत आहत हैं। गौरतलब है कि इन पदाधिकारियों ने 26 जून को अपना इस्तीफा सौंपा था, जिसकी पुष्टि अगले ही दिन कोषाध्यक्ष ने की थी। अब इस निर्णय के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा न केवल अपने पदों से, बल्कि ट्रस्ट की आजीवन सदस्यता से भी बाहर हो गए हैं।

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ट्रस्ट में रिक्त पदों का संकट और भविष्य की चुनौतियां

इन इस्तीफों के बाद ट्रस्ट की संरचना में रिक्तियों का संकट खड़ा हो गया है। ट्रस्ट में अब सदस्यों के तीन पद खाली हो गए हैं, जिसमें चंपत राय, अनिल मिश्रा और हाल ही में दिवंगत हुए ट्रस्टी बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा का स्थान शामिल है। वर्तमान में ट्रस्ट में 11 नियमित सदस्य कार्यरत हैं। इसके अलावा, एक गंभीर प्रशासनिक चुनौती यह भी है कि ट्रस्ट में उपाध्यक्ष का पद लंबे समय से खाली है, जिसके कारण अध्यक्ष की अनुपस्थिति में बैठक की अध्यक्षता करने को लेकर समस्या उत्पन्न हो रही है। ट्रस्ट की इस पदेन संरचना में केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी एवं नृपेंद्र मिश्रा जैसे प्रभावशाली व्यक्तित्व शामिल हैं।

एसआईटी और पुलिस की समानांतर जांच जारी

यह पूरा घटनाक्रम ऐसी स्थिति में सामने आया है जब चंदे में गबन के कथित आरोपों को लेकर दो समानांतर जांच प्रक्रियाएं चल रही हैं। प्रशासन द्वारा गठित एसआईटी मामले की तह तक जाने के लिए जांच कर रही है, जिसका कार्यकाल जुलाई के अंत तक विस्तारित कर दिया गया है। वहीं, दूसरी ओर ट्रस्ट की शिकायत पर पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर भी छानबीन की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी और पुलिस ने अब तक चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के बयान दर्ज किए हैं। हालांकि, अभी तक इन पदाधिकारियों के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है, लेकिन ट्रस्ट का यह निर्णय मामले की गंभीरता को साफ तौर पर दर्शाता है।

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