Sonam Wangchuk Protest : शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर उपजे संकट के बीच सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने केंद्र सरकार को एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील संदेश दिया है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि वह इस मामले में तुरंत पहल करे और प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत की मेज पर बैठे। हजारे का स्पष्ट मत है कि सरकार को किसी भी अनहोनी या दुखद परिणाम का इंतजार नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संवाद स्थापित करने में न तो कोई बुराई है और न ही कोई नुकसान, बल्कि बातचीत के माध्यम से ही लोकतंत्र में जटिल समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है। उनकी यह टिप्पणी वांगचुक की बिगड़ती स्थिति पर देशभर में बढ़ रही चिंता के बीच आई है।

मेडिकल रिपोर्ट में स्वास्थ्य को लेकर गंभीर संकेत
पिछले 20 दिनों से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को 21वें दिन दिल्ली पुलिस ने सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों की प्रारंभिक मेडिकल जांच में वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर कई चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वे गंभीर डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) और पोटैशियम की भारी कमी से जूझ रहे हैं। इसके अलावा, उनके शरीर में कीटोन का स्तर भी खतरनाक रूप से बढ़ गया है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि डिहाइड्रेशन के साथ कीटोन का उच्च स्तर किडनी के कार्य करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है और अन्य गंभीर मेटाबोलिक जटिलताएं पैदा कर सकता है। इसी वजह से अस्पताल प्रशासन ने उन्हें कड़ी निगरानी में रखा है और परिवार को उचित उपचार के लिए आवश्यक सलाह दी जा रही है।

VIDEO | “Government should not wait for a tragic outcome, and there is no harm in holding discussions”, says Activist Anna Hazare on Delhi Police shifting activist Sonam Wangchuk to hospital.
(Source: Third Party)
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— Press Trust of India (@PTI_News) July 18, 2026
अस्पताल के बाहर सुरक्षा का घेरा और स्थिति पर नजर
सोनम वांगचुक के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती होने के बाद वहां की सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व रूप से बढ़ा दिया गया है। अस्पताल परिसर के भीतर और आसपास दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई है। इस सुरक्षा घेरे का मुख्य उद्देश्य अस्पताल में आने-जाने वाले लोगों को नियंत्रित करना और सोनम वांगचुक के समर्थकों की भीड़ को व्यवस्थित रखना है, ताकि वहां किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न फैले। पुलिस प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर संभव सतर्कता बरत रहा है, जबकि अस्पताल के बाहर समर्थकों की बेचैनी बढ़ती जा रही है।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव के दावों का खंडन
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान जंतर-मंतर पर उस समय तनाव की स्थिति बन गई जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने वांगचुक को ले जाते समय लाठीचार्ज किया। इन आरोपों ने आंदोलन को और अधिक गर्मा दिया। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई के दौरान न तो किसी प्रदर्शनकारी को हिरासत में लिया गया और न ही किसी भी स्तर पर बल प्रयोग या दुर्व्यवहार की घटना हुई। पुलिस के अनुसार, पूरी कार्रवाई बेहद संयमित तरीके से और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह के बाद ही की गई। इस घटनाक्रम ने आंदोलन और प्रशासन के बीच के विश्वास के संकट को एक बार फिर सामने ला दिया है।
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