Akhilesh Yadav Statement : उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की स्कूल मर्जर पॉलिसी अब एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनती जा रही है। जहां सरकार का कहना है कि यह नीति छात्रों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए लाई गई है, वहीं विपक्षी दल, खासकर समाजवादी पार्टी (सपा), इसे शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने वाला कदम बता रही है। अब सपा ने सरकार के खिलाफ ‘PDA पाठशाला’ शुरू कर दी है, जिसका उद्देश्य है – “जहां शिक्षक नहीं, वहां समाजवादी पढ़ाएंगे।”

क्या है ‘PDA पाठशाला’?
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस अभियान की शुरुआत की है। PDA यानी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक, यह सामाजिक गठबंधन सपा की राजनीति की आधारशिला है, और अब इसके नाम पर पार्टी ने शिक्षा के क्षेत्र में भी सक्रिय हस्तक्षेप की रणनीति अपनाई है। अखिलेश यादव का कहना है कि,”सरकार खुद मान रही है कि कई स्कूल बंद कर दिए गए हैं। जब तक वहां शिक्षक नहीं आते, समाजवादी कार्यकर्ता बच्चों को पढ़ाते रहेंगे।”

स्कूल मर्जर पॉलिसी क्या है?
राज्य सरकार ने 16 जून 2025 को एक आदेश जारी किया, जिसके अनुसार प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूलों में यदि 50 से कम छात्र हैं, तो उन्हें पास के किसी बड़े स्कूल में मिला दिया जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुविधाएं मिलेंगी, क्योंकि छोटे स्कूलों में अक्सर शिक्षकों की भारी कमी और अधूरी बुनियादी सुविधाएं देखने को मिलती हैं। लेकिन विपक्ष का आरोप है कि इस नीति के ज़रिए सरकार शिक्षा को बंद करने का काम कर रही है, जिससे ग्रामीण और दूरदराज़ इलाकों के गरीब बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ेगा।
सपा का विरोध, शिक्षक की गिरफ्तारी
PDA पाठशाला के तहत सपा कार्यकर्ता उन गांवों में जाकर पढ़ाने लगे हैं जहां स्कूलों को बंद कर दिया गया या मर्ज कर दिया गया है। लेकिन हाल ही में एक स्वयंसेवी शिक्षक को पुलिस ने हिरासत में ले लिया, जिससे इस पूरे आंदोलन ने तूल पकड़ लिया है। अखिलेश यादव ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा: “पुलिस PDA पाठशाला नहीं रोक सकती। मुख्यमंत्री को खुद जाकर स्कूलों की हालत देखनी चाहिए।”
BJP की प्रतिक्रिया
वहीं, भाजपा और सरकार का पक्ष है कि सपा इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रही है। सरकार का कहना है कि यह फैसला छात्रों के हित में लिया गया है और स्कूलों के विलय से शिक्षा व्यवस्था अधिक संगठित और प्रभावशाली बनेगी। उत्तर प्रदेश में शिक्षा को लेकर छिड़ी यह जंग अब केवल नीति और प्रक्रिया तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह सीधे तौर पर राजनीतिक मोर्चेबंदी में बदल गई है। समाजवादी पार्टी शिक्षा के बहाने जनसंपर्क और जनाधिकार की ज़मीन मजबूत करना चाह रही है, तो वहीं सरकार सुधार की बात कर रही है। PDA पाठशाला बनाम स्कूल मर्जर – यह मुद्दा आने वाले चुनावों में एक गंभीर बहस का केंद्र बन सकता है।












