Bihar Assembly Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने शनिवार को सीट शेयरिंग का औपचारिक ऐलान कर दिया है। इस बार बीजेपी और जेडीयू (JDU) बराबरी के आधार पर मैदान में उतरेंगी, जबकि एनडीए के अन्य घटक दलों को भी सीटों का संतुलन साधकर शामिल किया गया है।

सीटों का बंटवारा कुछ इस प्रकार
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भारतीय जनता पार्टी (BJP): 101 सीटें
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जनता दल यूनाइटेड (JDU): 101 सीटें
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लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) – LJP(R): 29 सीटें
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हिंदुस्तान अवाम मोर्चा (HAM): 6 सीटें
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राष्ट्रीय लोक जनता दल (RLJD): 6 सीटें
इस प्रकार एनडीए कुल 243 सीटों पर साझा रणनीति के तहत चुनाव लड़ेगा।

2020 के आंकड़ों से क्या है फर्क?
2020 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 110 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 74 सीटें जीती थीं। वहीं जदयू ने 115 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन उसे सिर्फ 43 सीटों पर जीत मिली थी। इस बार सीटों की संख्या घटाकर दोनों प्रमुख दलों ने 101-101 के बराबर फार्मूले पर सहमति जताई है, जिससे संगठनात्मक एकता और तालमेल को बढ़ावा देने का संकेत मिलता है।
चिराग पासवान को 29 सीटें, बढ़ा प्रभाव
चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को इस बार 29 सीटें मिली हैं। यह संख्या इस बात का संकेत है कि एनडीए में चिराग की स्वीकार्यता और राजनीतिक हैसियत बढ़ी है। 2020 में अलग चुनाव लड़ने वाले चिराग पासवान को इस बार गठबंधन में औपचारिक तौर पर अहम भूमिका दी गई है।
मांझी और कुशवाहा को मिला सीमित स्थान
हम (HAM) प्रमुख जीतन राम मांझी और आरएलजेडी (RLM) प्रमुख उपेन्द्र कुशवाहा को 6-6 सीटें दी गई हैं। इससे स्पष्ट है कि एनडीए नेतृत्व ने छोटे दलों को संतुलन बनाकर गठबंधन में रखा है, ताकि जातीय समीकरण और क्षेत्रीय प्रभाव को भी साधा जा सके।
बीजेपी-जेडीयू में तालमेल का संदेश
बीजेपी और जेडीयू का बराबर सीटों पर लड़ना यह संकेत देता है कि नीतीश कुमार और बीजेपी नेतृत्व के बीच रिश्ते सामान्य हो रहे हैं और 2024 लोकसभा चुनाव के बाद की कटुता को भुलाकर दोनों दल एकजुट होकर चुनाव लड़ने को तैयार हैं।
बिहार एनडीए ने 2025 विधानसभा चुनाव में मजबूत और संतुलित सीट शेयरिंग रणनीति पेश की है। जहां बड़े दलों को बराबरी पर रखा गया है, वहीं सहयोगी दलों को भी उचित प्रतिनिधित्व देकर एकजुटता का संदेश दिया गया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह सीटों का गणित जनता के वोटों के अंकगणित में बदल पाएगा या विपक्ष इसे चुनौती दे पाएगा।










