FIFA Punishment: फीफा ने जून 2025 में खेले गए विश्व कप क्वालीफायर मुकाबलों के दौरान दर्शकों द्वारा किए गए नस्लवादी और भेदभावपूर्ण व्यवहार को लेकर कड़ा कदम उठाया है। इस बार अर्जेंटीना समेत छह देशों के फुटबॉल महासंघों पर भारी जुर्माना लगाया गया है। इनमें अर्जेंटीना, अल्बानिया, चिली, कोलंबिया, सर्बिया और बोस्निया-हर्जेगोविना शामिल हैं।

फीफा ने साफ किया है कि वह नस्लवाद और भेदभाव के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाए हुए है, और स्टेडियम में ऐसा कोई व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह कार्रवाई फुटबॉल की छवि को बचाने और एक समावेशी खेल वातावरण बनाए रखने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

अल्बानिया पर सबसे ज्यादा जुर्माना
7 जून को अल्बानिया और सर्बिया के बीच हुए मैच के दौरान राष्ट्रगान के समय भारी व्यवधान हुआ। इसे फीफा ने “अनुचित संदेश” करार दिया और इसे खेल भावना के विरुद्ध बताया। इस गंभीर उल्लंघन के चलते अल्बानियाई फुटबॉल महासंघ पर 161,500 स्विस फ़्रैंक (लगभग ₹1.76 करोड़ रुपये) का रिकॉर्ड जुर्माना लगाया गया है।
अल्बानिया और सर्बिया के बीच राजनीतिक तनाव का असर एक बार फिर फुटबॉल मैदान पर देखने को मिला है। 2014 की कुख्यात “ड्रोन घटना” अब भी दोनों देशों के रिश्तों पर असर डालती है। 11 अक्टूबर को होने वाले अगले मैच को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।
अर्जेंटीना, चिली और कोलंबिया भी सूची में
10 जून को अर्जेंटीना और कोलंबिया के बीच ब्यूनस आयर्स में खेले गए मैच के दौरान भी दर्शकों द्वारा नस्लभेदी व्यवहार दर्ज किया गया। इस पर अर्जेंटीना फुटबॉल महासंघ पर 120,000 स्विस फ़्रैंक (लगभग ₹1.31 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया गया।
इसी तरह 5 जून को चिली और अर्जेंटीना के बीच हुए मुकाबले में चिली पर 115,000 स्विस फ़्रैंक (लगभग ₹1.26 करोड़ रुपये), और 6 जून को कोलंबिया बनाम पेरू मैच में कोलंबिया पर 70,000 स्विस फ़्रैंक (₹78 लाख रुपये) का जुर्माना लगा।
सर्बिया और बोस्निया भी दंडित
सर्बिया, जिसने 10 जून को सैन मैरिनो से मुकाबला खेला था, पर 50,000 स्विस फ़्रैंक (₹56 लाख रुपये) का जुर्माना लगाया गया है। वहीं बोस्निया और हर्जेगोविना, जिनका मुकाबला भी सैन मैरिनो से था, पर 21,000 स्विस फ़्रैंक (₹23.5 लाख रुपये) का दंड लगा है।
फीफा का उद्देश्य: नस्लवाद मुक्त फुटबॉल
फीफा ने बयान में कहा कि ये सभी दंड अनुशासन समिति की समीक्षा के बाद लगाए गए हैं। संगठन का मकसद स्पष्ट है फुटबॉल को एक ऐसा मंच बनाना जहां हर खिलाड़ी और दर्शक सुरक्षित और सम्मानित महसूस कर सके।
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